Celebration of diwali 2020 kaise manaye :2020 दिवाली का जश्न कैसे मनाएं?

कैसे मनाएं दिवाली? (How to celebrate Diwali?), कब है दिवाली? (When is diwali) आइयें जाने कैसे मनाएं 2020 की दिवाली? (How to celebrate-2020-Diwali?) Mesothelioma Law Firm 

यह हमारे जीवन की पहली दिवाली है, जब हम त्योहार की खुशी के साथ-साथ एक महामारी का सामना कर रहे हैं. कोविड अभी गया नहीं हैं. लड़ाई लंबी है. इस साल पटाखे नहीं जलाने चाहिए क्योंकि जीवन आपका है, फेफड़े भी आपके हैं.जीवन भी आपका और जीवन आपका अनमोल है. Donate Car to Charity California

दिवाली का त्योहार केवल एक सप्ताह दूर है. इस दिवाली आप क्या करने जा रहे हैं? जब दीवाली आती है, तो हम नए कपड़े खरीदने, तैयार होने, घर को सजाने और शानदार भोजन पकाने की योजना बनाते हैं. दिवाली का ख्याल दिलों में खुशी भर देता है. जो लोग जानना चाहते हैं कि दीवाली कब है (When Is Diwali) तो उन्हें बताएं कि इस बार दिवाली 14 नवंबर को है. How to Donate A Car in California

Celebration of diwali 2020 kaise manaye : 2020 दिवाली का जश्न कैसे मनाएं?

दिवाली का त्यौहार धनतेरस से शुरू होता है और भाई दूज के साथ समाप्त होता है. दीपावली का त्यौहार आते ही आपको स्कूल के दिन याद आ जाते होंगे जब हमें दीपावली पर एक निबंध लिखने के लिए स्कूल में दिया जाता था और हम इसमें दीपावली के महत्व
पर चर्चा करते थे. Sell Annuity Payment

दीवाली हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है. यह एक 5-दिवसीय त्योहार है, जो धनतेरस से भाई दूज तक 5 दिनों तक चलता है. दीपावली अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाने वाला त्योहार है. हर साल कार्तिक मास की अमावस्या के दिन दीपावली पर महालक्ष्मी
की पूजा करने का विधान है. वर्ष 2020 में दीपावली का त्योहार 14 नवंबर 2020, शनिवार को मनाया जाएगा.

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छोटी दिवाली त्योहार के एक दिन पहले मनाई जाती है. छोटी दिवाली को नरका चतुर्दशी भी कहा जाता है. इस दिन घरों में यमराज की पूजा की जाती है. छोटी दिवाली पर शाम को घर में दीपदान करने के बाद उसे कहीं बाहर रख दिया जाता है. इसे यम का दीपक कहा जाता है. इस दिन कुल 12 दीपक जलाए जाते हैं. कहा जाता है कि यमराज के लिए तेल का दीपक जलाने से अकाल मृत्यु भी टल जाती है.

छोटी दिवाली को सुंदरता और उम्र का दिन भी माना जाता है. इस दिन, भगवान यम, युगों के देवता और सौंदर्य के प्रतीक शुक्र की पूजा की जाती है. इस दिन श्री कृष्ण की भी पूजा की जाती है, क्योंकि उन्होंने इसी दिन नरकासुर का वध किया था. यह भी माना जाता है कि इस दिन हनुमानजी का जन्म हुआ था. अगर जीवन में उम्र या स्वास्थ्य की कोई समस्या है, तो इस दिन प्रयोग करने से दूर हो जाते हैं. Structures Annuity Settlement

Celebration-of-diwali-2020-kaise-manaye : 2020 दिवाली का जश्न कैसे मनाएं?

  • 12 नवंबर, गुरुवार, गोवत्स द्वादशी, वसु बरस.
  • 13 नवंबर , शुक्रवार को धनतेरस, धन्वंतरि त्रयोदशी, यम दीपदान, काली चौदस,
    हनुमान पूजा.
  • 14 नवंबर , शनिवार को नरक चतुर्दशी, दिवाली, महालक्ष्मी पूजन. (शाम को 5 बजकर 40 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 15 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त
    रहेगा)
  • 15 नवंबर, रविवार को गोवर्धन पूजा, अन्नकूट, बलि प्रतिपदा.
  • 16 नवंबर , सोमवार को प्रतिपदा, यम द्वितिया, भैया दूज, भाईदूज 5 दिवसीय
    पर्व की समाप्ति.

दिवाली (Diwali) का त्यौहार धनतेरस के दिन से शुरू होता है. उसके बाद नरका चतुर्दशी को यम नामक दीपक जलाने की परंपरा है. अगले दिन, कार्तिक माह की अमावस्या को दिवाली का त्योहार मनाया जाता है. हर बार हम अमावस्या के दिन दिवाली (लक्ष्मी पूजन दिवस) मनाते हैं, लेकिन इस बार छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली एक ही दिन पड़ रही है.

ज्योतिष के अनुसार, इस बार दान और स्नान की अमावस्या 15 तारीख को है. लेकिन दिवाली पर लक्ष्मी पूजन 14 नवंबर को ही किया जाएगा. आइए इसे सही ढंग से समझते हैं… चतुर्दशी तिथि 12 नवंबर 2020 को त्रयोदशी (धनतेरस की तिथि) सुबह 9:30 बजे से शुरू होगी जो 13 नवंबर को शाम 5 बजकर 59 मिनट तक चलेगी उसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू होगी जो 14 नवंबर को 1 बजकर 16 मिनट तक रहेगी उसके बाद अमावस्या शुरू होगी, जो 15 नवंबर को सुबह 10: 16 बजे होगी. दीवाली की रात को पूजा की जाती है, इसलिए 14 नवंबर को दीवाली मनाई जाएगी. जहां 13 से 14 तारीख को चतुर्दशी शुरू होगी, वहीं लक्ष्मी पूजन के दिन नरक चतुर्दशी भी मनाई जाएगी. लेकिन दान और स्नान 15 नवंबर को ही किया जाएगा. Car Insurance Quotes Colorado

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दिवाली का महत्व: importance of Diwali

वैसे तो सर्वविदित है कि दशहरे के बीस दिन बाद भगवान श्रीराम दिवाली के दिन ही अयोध्या लौटे थे इसलिए उस दिन पूरी अयोध्या नगरी को दीपों से सजाया गया था और भगवान राम का स्वागत जगमगाती रौशनी से किया गया था. यही कारण मानते हुए इस दिन दिवाली मनाई जाती है.

हालांकि दिवाली के और भी कुछ महत्व है. कहते हैं कि कौरवों से चौसर में हारने के बाद पांडव 14 साल का वनवास भोगकर दिवाली के दिन ही वापस लौटे थे और इस दिन दीपक जलाकर उनका स्वागत किया गया था. दिवाली भारत ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशों में मनाई जाती है. Annuity Settlements

दीपावली पर श्रीयंत्र की पूजा करने की परंपरा : Tradition to worship Shri Yantra on Deepawali

दीपावली पर देवी लक्ष्मी के साथ ही श्रीयंत्र की भी पूजा करने की परंपरा है. इस बार गुरु धनु राशि में रहेगा. ऐसी स्थिति में श्रीयंत्र का पूरी रात कच्चे दूध से अभिषेक करना बहुत शुभ रहेगा.

शनि अपनी राशि मकर में रहेगा, शनिवार और अमावस्या का योग भी रहेगा. इस योग में दीपावली पर तंत्र-यंत्र पूजा
करने का शुभ योग रहेगा. Dayton Freight Lines

दीपावली पर करें ये शुभ काम : Do this auspicious work on Deepawali

  • दीपावली पर हनुमानजी, यमराज, चित्रगुप्त, कुबेर, भैरव, कुलदेवता और पितरों का पूजन जरूर करना चाहिए.
  • लक्ष्मीजी के साथ भगवान विष्णु का भी पूजन करना बहुत शुभ रहता है.
  • पूजन में श्री सूक्त का पाठ करना चाहिए.
  • चाहें तो विष्णुसहस्रनाम, गोपाल सहस्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं.
दिवाली’ अर्थात अंधकार से प्रकाश की ओर जाने की कामना : Diwali means the desire to move from darkness to light

वास्तव में दीवाली (Diwali) कोई एक दिवसीय पर्व नही, अपितु यह अनेकों त्योहारों का समूह है, इसलिए इसे उत्सवों का मौसम भी कहा जाता है जिसे हम बहुत उमंग, उत्साह, आनंद और खुशियों के रंग के साथ मनाते हैं. हम इसे ‘प्रकाश का उत्सव’ भी कहते हैं क्योंकि यह हमारे जीवन को खुशी से प्रकाशित करता है. यह पर्व बुराई पर अच्छाई, अंधेरे पर प्रकाश, अज्ञानता पर ज्ञान और निराशा पर आशा की जीत का प्रतीक है.

न जाने खुशियों और उल्लास के कितने रंग समाहित हैं इस पर्व में, परन्तु आज यह उत्सव सिर्फ पटाखों की तेज़ आवाजों और हानिकारक धुएँ का प्रतीक बन कर रह गया है, जिनकी वजह से होने वाला ध्वनि एवं वायु प्रदूषण न केवल हमारे लिए बल्कि हमारे पूरे पर्यावरण के लिए हानिकारक है. इस बार हम सब पर्यावरण को बिना प्रदूषित किये दीपावली के उत्सव को मनाएं.

पटाखों से होने वाले नुकसान :
  • पटाखों से सबसे ज्यादा नुकसान उन बुजुर्गों को होता है, जो एक तरफ बुढ़ापे का मार झेल रहे होते हैं और दूसरी तरफ तमाम बीमारियों से घिरे होते हैं.
  • गर्भवती महिलाओं के लिए तो पटाखे किसी विनाशकारी हथियार से कम नहीं हैं. पटाखों से सल्फर डाइआक्साइड और नाइट्रोजन डाइआक्साइड आदि हानिकारक गैसें हवा में घुल जाती हैं. जो हमारे शरीर के लिए नुकसानदेह होती हैं.
  • पटाखों की धुंध यानी स्मॉग से सांस फूलने, घबराहट, खांसी, हृदय और फेफड़े संबंधी दिक्कतें, आंखों में संक्रमण, दमा का अटैक, गले में संक्रमण आदि के खतरे होते हैं.
  • कई विशेषज्ञों के अनुसार, दिवाली के दौरान आतिशबाजी से दिल के दौरे, रक्तचाप, नाक की एलर्जी, ब्रोंकाइटिस और निमोनिया जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए दमा और हृदय रोगियों को दीपावली के अवसर पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए.
  • पटाखों से जलने, आंखों को गंभीर क्षति पहुंचने और कान का पर्दा फटने तक की नौबत आ सकती है.
  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, दिल्ली में अग्नि प्रदूषण छह से दस गुना और दिवाली के बाद 15 डेसीबल से ध्वनि स्तर बढ़ जाता है.
  • तेज आवाज वाले पटाखों का बच्चों, गर्भवती महिलाओं, हृदय और सांस के रोगियों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है.
  • विशेषज्ञों के अनुसार, पटाखों में कम से कम 21 प्रकार के रसायन मिलाए जाते हैं. वहीं, कई वैज्ञानिकों का कहना है कि एक लाख कारों के धुएं से जितना नुकसान होता है, पर्यावरण को 20 मिनट की आतिशबाजी से उतना ही नुकसान होता है.
  • सामान्य दिनों में, शोर का मानक स्तर दिन में लगभग 55 डेसिबल और रात में 45 डेसिबल होता है, लेकिन दिवाली के समय तक यह 70 से 90 डेसीबल तक पहुंच जाता है. इतना शोर हमें बहरा करने के लिए काफी है.
  • हर बार दीपावली पर कई लोग पटाखों से जल जाते हैं और कई अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं. अनार, रॉकेट, रस्सी बम जैसे धमाकेदार पटाखों के शौकीनों के साथ इन हादसों की ज्यादा संभावना होती है. ऐसे में क्षणिक सुख पहुंचाने वाली विध्वंसकारी चीज से बचें. इस दिवाली पटाखों को नजरअंदाज करें.
  • 462 सिगरेट पीने जितना असर होता है सांप वाला एक पटाखा जलाने से, अनार को जलाने से 34 सिगरेट पीने जितना फर्क पड़ता है.
  • इंडिया स्पेंड की रिपोर्ट के अनुसार एक फुलझड़ी जलने से होने वाला नुकसान 74 सिगरेट पीने के बराबर होता है. Better Conference Calls
पटाखे के कौन से केमिकल शरीर को क्या नुकसान पहुंचाते हैं: Which chemicals do firecrackers cause harm to the body
  • सल्फर डाइऑक्साइड (Sulfur Dioxide) : यह फेफड़ों और श्वांस रोगियों को हानि पहुंचाता है.
  • कैडमियम (Cadmium) : ज्यादा मात्रा में शरीर में जाने पर यह किडनी और लीवर को नुकसान पहुंचाता है. नर्व सिस्टम पर असर डालता है.
  • कॉपर (Copper) : यह श्वसन तंत्र को हानि पहुंचाता है.
  • लीड (Lead) : यह नर्व सिस्टम पर काफी बुरा असर डालता है.
  • नाइट्रेट (Nitrate) : त्वचा को नुकसान पहुंचाता है, आंखों में जलन पैदा करता है और बच्चों के श्वसन तंत्र पर बुरा असर डालता है
  • क्रोमियम (Chromium) : यह भी त्वचा को हानि पहुंचाता है, फेफड़ों के कैंसर का कारक भी बन सकता है.

दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं

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