Hariyali teej kya hai?:हरियाली तीज क्या है?

हरियाली त्योहार कैसे मनाएं? (Hariyali festival kaise manaye?), सावन में हरियाली तीज कैसे मनाए? (Savan me hariyali teej kaise manaye?) हरियाली तीज क्या है?(Hariyali teej kya hai?)

श्रावण मास में हरियाली तीज का त्योहार आता है. इस माह में चारों तरफ हरियाली ही हरियाली रहती है. श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज मनाई जाती है जो उत्तर भारत का एक प्रमुख त्योहार है.

Hariyali teej kya hai?:हरियाली तीज क्या है?

सावन का महीना प्रेम का प्रतिक होता है. हरियाली के माध्यम से प्रकृति हमारे लिए प्रेम दर्शाती है.

प्रकृति चारों तरफ हरियाली के माध्यम से इस धरती को सजाती है और धरती पर अवतरित मानव को हरियाली तीज (Hariyali teej) के मध्यम से प्रेम बरसाने का मौका देती है.

महिलाओं को प्रेम प्रगट करने का और पति की लंबी उम्र की कामना करने का दिन अर्थात हरियाली तीज है. तो चलिए जानते है, हरियाली तीज (Hariyali teej) क्या है?

हिंदू धर्म में लोग श्रावण मास का बेसब्री से इंतजार करते हैं. इस महीने में, शिवरात्रि के बाद त्योहार शुरू होते हैं.

पहले शिवरात्रि आती है, उसके बाद हरियाली तीज, नाग पंचमी, रक्षाबंधन, कजरी तीज, जन्माष्टमी, हरतालिका तीज, दशहरा, नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और छठ पूजा. गौरतलब है कि सावन का महीना 6 जुलाई से शुरू हो चुका है.

सावन शिवरात्रि वसंत ऋतु में है.एक साल में 12 शिवरात्रि होती हैं और हर महीने त्रयोदशी के दिन आती है. इन 12 शिवरात्रियों में, फाल्गुन शिवरात्रि और सावन शिवरात्रि का सबसे अधिक महत्व है.

यह भी पढ़े :

 

हिरयाली तीज कब है:

यह पर्व सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है. हरियाली तीज का यह त्योहार 23 जुलाई 2020 को हो सकता है.

 

हिरयाली तीज क्यों मानते है:

सुहागन स्त्रिया इस दिन निर्जला व्रत रखती है और नये वस्त्र धारण करके माता पार्वती की पूजा करते है. हिंदू धर्म को मानने वाली महिलाओं के लिए हरियाली तीज त्योहार बहुत खास है.

तीज त्योहार भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. इस दिन, सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए पूरे दिन उपवास रखती हैं.

इतना ही नहीं, बल्कि अविवाहित लड़कियां भी अच्छे पति की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं. यह माना जाता है कि हरियाली तीज का व्रत विवाहित महिलाओं के पति के जीवन का नेतृत्व करता है, जबकि अविवाहित लड़कियों को वांछित जीवन साथी मिलता है.

हरियाली तिज की पौराणिक कथा :

सावन का महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय है. सावन के महीने में शिव की विशेष पूजा करने की परंपरा है. सावन के महीने में सुबह से ही मंदिरों में भीड़ जुटनी शुरू हो जाती है.

लेकिन आज के तारीख में अर्थात 2020 कोरोना वायरस रोग (COVID-19) के कारण सभी लोग घर पर ही रहे सुरक्षित रहे. पौराणिक कथा के अनुसार  देवी पार्वती का पुनर्जन्म पर्वतराज हिमालय के घर पर हुआ था.

देवी पार्वती ने भगवान शिव को अपना पति बनाने के लिए सावन के महीने में तपस्या की इसके बाद, भगवान शिव ने प्रसन्न होकर माँ पार्वती की इच्छाएँ पूरी कीं.सावन के महीने में, भगवान भोले शंकर ने देवी पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में माना, इसलिए भगवान शिव की पूजा सावन के माह में करने से मनवांछित फल मिलता है.

समुद्र मंथन के दौरान देवताओं और असुरों के बीच मंथन हुआ था, तब समुद्र से विष का कलश निकला था. लेकिन न तो देवता और न ही दानव इस विष के कलश को प्राशन करने के लिए तैयार थे. तब भगवान शंकर ने विष के प्रभाव को खत्म करने और सारे संसार की रक्षा के लिए इस विष को पी लिया.

विष के प्रभाव से भगवान शिव की गर्मी बढ़ती जा रही थी, तब सभी देवताओं ने विष के प्रभाव को कम करने के लिए भगवान शंकर को जल अर्पित करना शुरू कर दिया. तब से भगवान शिव को सावन के महीने में जल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है.

महिलाएं एकत्रित होकर माता पार्वती की पूजा करने के लिए माँ पार्वती की मूरत बनाते है और रेशिम वस्त्र, अलंकारों से सजाया जाता है.
महिलाएं पतिका ध्यान करते  हुए हरियाली तीज की कथा सुनते है. कथा सुनते समय सभी महिलाएं अपने पति देव की लंबी उम्र की कामना करते है.

 

हरियाली तीज पर श्रृंगार का महत्व:

हरी चूड़ियाँ :

प्रकृति का यह हरा रंग आंखों में ठंडक लाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाओं को वसंत में हाथों में हरी चूड़ियां और मेंहदी भी लगाती है. सावन  का मास हरियाली का प्रतिक है.

इस माह में महिलाएं हरी चूड़ियाँ पहनती है. हरी चूड़ियाँ पहनने से पति के सुख समृद्धि, दीर्घायु और स्वस्थ जीवन प्राप्त होता है.

 

हरे कपड़े: 

सावन के महीने में प्रकृति हरियाली से सबका मन अपने और आकर्षित करती है. हरियाली तीज में महिलाएं हरे रंग के कपड़े पहनती हैं. यह आंखों के लिए भी राहत देने वाला रंग है.

 

मेहंदी:

हरियाली तीज के त्योहार पर मेहंदी लगाने का रिवाज है. इस मेहंदी को लगाने के पीछे एक पौराणिक कहानी भी है. एक बार की बात है, माता पार्वती शंकर भोलेनाथ को आकर्षित करना चाहती थीं.

माता पार्वती ने भोलोनाथ को प्रशन्न करने के लिए हाथों में और पैरों पर मेहंदी रचाई और मेहंदी देख कर भोलेनाथ प्रसन्न  हुए. इसी तरह आज भी हरियाली तीज के त्यौहार पर महिलाएं मेहंदी रचती है.

 

हरी बिंदी : 

हरियाली तीज के पर्व पर महिलाएं अपने 16 श्रृंगार में हरी बिंदियों को शामिल करते है.

 

कान की बाली :

हरियाली तीज में आप अपने मेकअप में हरे झूमर को शामिल कर सकते हैं, जो आपकी सुंदरता में चार चांद लगा देगा.

 

सावन शिवरात्रि का महत्व:

सावन शिवरात्रि का व्रत बहुत महत्वपूर्ण है. इस दिन उपवास करने से भगवान शिव की विशेष कृपा मिलती है. सावन शिवरात्रि के दिन उपवास करने से क्रोध, ईर्ष्या, अभिमान और लालच से मुक्ति मिलती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन शिवरात्रि का व्रत कुंवारी लड़कियों के लिए सबसे अच्छा माना जाता है.

व्रत का पालन करने से उन्हें मन चाहा वर मिलता है. दूसरी ओर, जो लड़कियां अपनी शादी में समस्याओं का सामना कर रही हैं, उन्हें सावन शिवरात्रि के व्रत का पालन करना चाहिए. सावन शिवरात्रि हर साल सावन शिवरात्रि के महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को
आती है. इस वर्ष सावन शिवरात्रि 19 जुलाई, 2020 को है.

 

यह भी पढ़े :

Postscript:

Post Name: हरियाली तीज क्या है?(Hariyali teej kya hai?)

Description: हरियाली तीज कैसे मानते है? इसकी जानकारी लेख में दी गई है. लेकिन इस साल (2020)कोरोना वायरस रोग coronavirus disease (covid-19) के कारन समूह से ना मनाएं.

दुरी बनाएं रखे, हमेशा मास्क का उपयोग करें, अपने परिवार की सुरक्षा अपने हाथ है इसलिए घर पर रहे सुरक्षित रहे.

अपनी सुरक्षा तो परिवार की सुरक्षा, परिवार की सुरक्षा तो गांव की सुरक्षा, गांव की सुरक्षा तो तहसील की सुरक्षा, तहसील की सुरक्षा तो जिले की सुरक्षा, जिले की सुरक्षा तो राष्ट्र की सुरक्षा, राष्ट्र की सुरक्षा तो पुरे देश की सुरक्षा.
Author: शीतल

Leave a Reply

error: Content is protected !!