Tourist places of “Dehradun”:”देहरादून” के पर्यटन स्थल

Tourist places of “Dehradun”:”देहरादून” के पर्यटन स्थल, Introduction to Dehradun District:देहरादून जिले का परिचय,Valley between mountains

”देहरादून” नाम में दो शब्द है। जैसे की, ”देहरा और दून” यह दो शब्द से ”देहरादून” शब्द की उत्पती हुई है। तो दोस्तों आगे जानते है की देहरादून शब्द की उत्पती कैसे हुई है। गुरु हर राय के पुत्र राम राय ने अपने अनुयायियों के साथ रहने के लिए इस जगह पर डेरा डालकर रहना शुरू किया। दून शब्द दूण से बना है। दूण शब्द संस्कृत के द्रोणी से बना है और संस्कृत में द्रोणी शब्द का अर्थ ‘ दो पहाड़ों के बिच की घाटी ‘ इस तरह से देहरा में दूण शब्द मिलाकर ‘ देहरादून ‘ शब्द की उत्पती हुई

"देहरादून" के पर्यटन स्थल | Tourist places of "Dehradun"

देहरादून उत्तराखंड राज्य की राजधानी है। जिला मुख्यालय दूनघाटी में स्थित है। देहरादून समुद्रतल से 2110 फुट की ऊचाई पर स्थित है। मसूरी, देहरादून की रानी के तल पर स्थित होने के कारण, गर्मी का मौसम भी सुखद है।

Dehradun 1699 में स्थापित किया गया था। देहरादून अपने पर्यटन, शिक्षा, वास्तुकला, संस्कृति और सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। अभयारण्य के पक्षी, सुंदर हसीन वादीया, चिड़ियाघर प्रेमियों का मन अपनी तरफ आकर्षित करते हैं।

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देहरादून जिले का परिचय | Introduction to Dehradun District

राजधानी – उत्तराखंड

जिले का मुख्यालय – देहरादून नगर

जिले की तहसील – 6 (1.देहरादून, 2.चकराता, 3.विकासनगर, 4.कलसी, 5.त्यूनी तथा 6.ऋषिकेश)

देहरादून, देश की राजधानी दिल्ली से 230 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस शहर को प्राकृतिक सुंदरता और संस्थान द्वारा भी जाना जाता है। राष्ट्रीय तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग, भारतीय सर्वेक्षण संस्थान, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, वन अनुसंधान संस्थान आदि स्थित है।

भारतीय राष्ट्रीय सैन्य कॉलेज और भारतीय सैन्य अकादमी शैक्षिक संस्थान स्थित है। बासमती चावल, चाय और लीची के बाग आदि इस जिले में उगाए जाते हैं।

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  • सहस्त्रधारा
  • मलशीमृग पार्क
  • गुच्छूपानी
  • खलंग स्मारक
  • चन्द्रबदनी
  • लच्छीवाला
  • डाकपत्थर
  • कलसी
  • दुन स्कुल
  • लक्ष्मणसिद्ध
  • तपोवन
  • वनअनुसन्धान केंद्र
  • टपकेश्वर महादेव मंदिर
  • रामराय दरबार

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सहस्त्रधारा (sahastradhara):

सहस्त्रधारा यह स्थान देहरादून से 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सहस्त्रधारा गंधक के पानी का झरना है। सहस्त्रधारा का शाब्दिक अर्थ ”द मिलियन फोल्ड स्प्रिंग” है। यह स्थान झरने, गुफा के लिए भी जाना जाता है जिनमे पानी पत्थर चुना के स्टैलेक्टाइट्स से टपकता है। सहस्त्रधारा के पास बालदि नदी है। इस नदी में गंधक का पानी बहता है। सैलानी गंधक के पानी को घर में ले जाते हैं। इस पानी में औषधीय गुण होते हैं। गंधक का पानी त्वचा रोगों को दूर करने में मदद करता है। Tourist places of “Dehradun”

मलशी मृग पार्क (Malashi Deer Park):

मसूरी मार्ग पर एक शिवलिंग श्रृंखला से घिरा, यह मिनी चिड़ियाघर देहरादून से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह पार्क बच्चों के लिए सबसे अच्छा बनाया गया है। यहा की सुंदरता मन को रोमांचित करती है। यह एक पिकनिक और पर्यटन स्थल बन गया है। Tourist places of “Dehradun”

गुच्छूपानी (Guchchhopanee):

गुच्छूपानी यह एक झरना है, इसे प्रकृति का करिश्मा कहा जा सकता है। क्यों की यह झरना जमीन के अंदर बहता है और कुछ दुरी पर पानी दिखाई देता है। इसलिए यह स्थान बहुत लोकप्रिय स्थान बन गया है। इस झरने का पानी गर्मियों के दौरान गर्म होता है और सर्दियों के दौरान गर्म होता है। यह स्थान देहरादून से 22 किलोमीटर दूर स्थित है। पिकनिक मनाने के लिए पर्यटक यहां आते हैं। फॉरेस्ट रेस्ट हाउस पर्यटकों के लिए उत्तम आवास है। पहाड़ियों से घिरी एक गुफा है। इस स्थान पर मनुष्य को आध्यात्मिक शांति मिल सकती है। इस स्थान तक पहुँचने के लिए, बस से अनार गाँव तक जाएँ बाद में 1 किलोमीटर पैदल चल कर पहुँच शकते है।

खलंग स्मारक (khalang smaarak):

रीसपिना नदी के किनारे खलंग स्मारक एक हजार फीट ऊंचा बना है। यह स्मारक देहरादून से सहस्त्रधारा के मार्ग पर स्थित है। अंग्रेजों और गोरखा के बीच युद्ध का प्रतीक है और स्मारक गढ़वाल के राजाओं की वीरता की यादों को भरता है।

चन्द्रबदनी (chandrabadanee):

यह स्थान देहरादून से 7 किलोमीटर दूर स्थित है। चंद्रबनी एक बहुत ही खूबसूरत जगह है। यह स्थान पहाड़ियों से घिरा हुआ है और गौतम कुंड के रूप में प्रसिद्ध है। पौराणिक कथा के अनुसार, गौतम ऋषि अपनी पत्नी और बेटी अंजनी के साथ रहते थे। स्वर्ग-पुत्री गंगा इस स्थान पर प्रकट हुई थीं और अब इसे गौतम कुंड के रूप में जाना जाता है।

लच्छीवाला (lachchhevala):

लच्छीवाला  देहरादून से 22 किमी दूर सोंग नदी के तट पर स्थित एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है। लच्छीवाला जंगल में नदी के किनारे होने के कारण यहां पर पर्यटक आते है। जंगली पशुपक्षी विचरण करते दिखते है जिस से सैलानियों को लगता है की प्रकृति के सौंदर्य को गरीब से देखते है।

डाकपत्थर (dakapatthar):

यह स्थान यमुना नदी के किनारे यमुना की पहाड़ियों के बीच स्थित है। यह जगह बहुत ही खूबसूरत होने के कारण यहां पर्यटक पिकनिक मनाने आते हैं। यह पार्क देहरादून की जल विद्युत परियोजना के पास निर्माण किया गया है।

कलसी (kalasee):

कलसी प्रकृति प्रेमियों के लिए एक सुंदर जगह है। देहरादून शहर से 99 किमी की दूरी पर और समुद्र तल से 7,000 फीट की दूरी पर स्थित है। कालसी की स्थापना कर्नल ह्यूम और अधिकारियों ने की थी।इस स्थान पर कमांडो का प्रशिक्षण दिया जाता है। “कालसी” देहरादून चकराता रोड पर 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सम्राट अशोक के प्राचीन शिलालेख पत्थर की शिला पर लिखे गए हैं। पत्थर पर पानी डालने पर ही आप इस लेख को पढ़ सकते हैं।

दून स्कुल (Doon School):

दून स्कुल की स्थापना 10 सितंबर 1935 में हुई। संस्थापक – सतीश रंजन दास है। यह स्कूल दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इस स्कूल में, पत्रकारों, राजनेताओं, अभिनेताओं, अभिनेत्रियों ने अध्ययन किया है। देश-विदेश के बच्चे पढ़ाई करने आते हैं। देश को आगे बढ़ाने वाले लोग इस स्कूल में पढ़े हैं।

लक्ष्मण सिद्ध (lakshman siddh):

यह स्थान देहरादून से 12 किलोमीटर दूर स्थित है। इस स्थान पर एक मंदिर है। रविवार को पर्यटक अधिक संख्या में आते हैं।

तपोवन (Tapovan):

द्रोणाचार्य ने इस स्थान पर ध्यान किया था, इसलिए इस स्थान को ‘तपोवन’ के नाम से जाना जाता है।

वन अनुसंधान (Forest research):

यह स्थान देहरादून से 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वन अनुसंधान संस्थान भारत में सबसे बड़ा स्थान है। इस संस्थान की स्थापना 1906 में इंपीरियल फॉरेस्ट इंस्टीट्यूट के रूप में हुई थी। इस संस्थान को राष्ट्र की संपत्ति घोषित कर चुके है। संस्थान का उद्घाटन 1921 में किया गया था। वन संबंधी शोध किए जाते हैं। यह संस्थान 2000 एकड़ में फैला हुआ है। इस में 7 संग्रालय है। सभी प्रकार के पौंधे उपलब्ध है।

टपकेश्वर भोलेनाथ मंदिर (Tapakeshwar Bholenath Temple):

टपकेश्वर मंदिर देहरादून से 6 किलोमीटर की दुरी पर प्रवाशी नदी के तट पर स्थित है।इस मंदिर का उल्लेख महाभारत में किया गया है। द्वापार युग में शिवलिंग पर ऊपर से दूध टपकता था कलयुग में दूध की जगह पानी टपकता है इसलिए इस स्थान का नाम टपकेश्वर मंदिर के नाम से प्रख्यात हुआ। यह धाम अनादि काल से विराजमान है।

पौराणिक कथा के नुसार-

टपकेश्वर गुफा देवताओं का निवास स्थान है। इस गुफा में भगवान शिव ध्यान करते थे। देवता उनकी पूजा अर्चना करते थे।देवताओं के बाद, ऋषियों ने शिव की पूजा की और उन्हें प्रसन्न किया, भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया। भगवान भोलेनाथ ने अपने भक्त और श्रद्धालुओं को दर्शन देकर उनका कल्याण किया। सात हजार वर्षों से, स्कंद पुराण में टपकेश्वर के नाम से शिवलिंग का वर्णन किया गया है। इस गुफा में भगवान भोलेनाथ ने द्रोणाचार्य को धनुर्विद्या का वरदान दिया था। द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा ने 6 महीने तक एक पैर पर खड़े होकर शिव की पूजा की और अपने लिए दूध की मांग की। उसी क्षण से, शिव लिंग पर दूध टपकना शुरू हो गया और अब कलयुग में पानी टपकने लगा है।

राम राय दरबार (ram ray darabar):

गुरु राम राय महाराज सिखों के सातवें गुरु और श्री हर राय के पुत्र थे। ओरंगजेब ने महाराज को हिन्दू पीर की उपाधि दिया गया है।

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