Jackal and camels friendship : सियार और ऊंट की दोस्ती

Jackal and camels friendship : सियार और ऊंट की दोस्ती, Story of jackal and camel:सियार और ऊंट की कहानी,Get what you sow:जो बोओ वही पाओ

एक दिन घने जंगल में सियार और ऊंट की मुलाखत हुई और दोनों में दोस्ती हुई। दोनों साथ में जंगल में टहलने लगे। हर दिन वे नदी पर पानी पीने जाते थे। एक दिन सियार की नजर नदी के दुसरे किनारे पर गई, नदी के दुसरे बाजु में उन्हें खरबूजे का बगीचा दिखा। सियार के मुँह में पानी आ गया। दोनों ने नदी के उस पार जाने की सोची। दोस्तों देखते है, सियार और ऊंट की दोस्ती कब तक कायम रहती है।

सियार और ऊंट की दोस्ती | Jackal and camels friendship

सियार और ऊंट की कहानी | Story of jackal and camel

ऊंट और सियार दोनों एक खूबसूरत जंगल में मिले और दोनों में दोस्ती हुई। सियार को एक दिन शरारत करने का मन हुआ।  उसने अपने दोस्त कैमल ब्रदर को बताया! ऊंट भाई आज एक पड़ोसी खेत में चलते हैं, खरबूजे काफी लगे है। उन्हें देखकर मेरा खाने को जी मचल रहा है। यह कहकर किसी तरह उसने ऊंट को तैयार करवा लिया। ऊंट और सियार दोनों खेत पहुचे। वहा खरबुजो पर एसे भिड़े जैसे किसी मनपसंद दावत हो। सियार का पेट जल्दी ही भर गया। मगर ऊंट अभी खरबूजे खाने में मग्न था। Jackal and camels friendship

सियार को लगा ऊंट सभी खरबूजे आज ही खत्म कर देगा। कल के लिए खरबूजे बचाकर रखना पड़ेगा। सियार बहुत होसियार था। वह एक पेड़ के निचे बैठकर गाना गाने लगा। हुआ….  हुआ….  हुआ….  हुआ।  बोला ” अरे मित्र सियार ! ये क्या कर रहे हो !खेत का मालिक आ जायेगा। सियार बोल उठा,  क्या करू भाई ! मुझे खाने के बाद गाने की आदत है। अगर गाना नहीं गाऊंगा तो मेरे पेट में दर्द होने लगता है। यह कहकर वह फिर से गाना गाने लगा।

तभी खेत का मालिक वहा पंहुचा। सियार झाडियों के पीछे छुपकर बैठ गया। ऊंट को खरबूजे खाते देखकर मालिक ने लाठी लेकर ऊंट को पिठने लगा। उसे पिठता देखकर सियार वहा से नव दो ग्यारा हो गया। ऊंट भी किसी प्रकार अपनी जान बचाकर वहा से भाग निकला। कुछ ही देर बाद वह जंगल पंहुचा। इसे देखकर सियार , ऊंट पर हसने लगा। ऊंट कुछ न बोला।

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कथा

कुछ दिन गुजर गए। एक दिन सियार बहुत होशियारी दिखा रहा था।  ऊंट ने सोच लिया था। आज सियार को उसकी होशियारी जरूर दिखाना पड़ेगा। ऊंट ने सियार से कहा ” चलो दोस्त ! आज नदी की सैर करते है। सियार ने कहा,  अरे कैमल ब्रदर! मुझे तो तैरना नहीं आता।   कैमल ब्रदर बोला कोई बात नहीं, तुम मेरी पीठ पर बैठ जाना और सियार राजी हो गया। वह कैमल ब्रदर की पीठ पर बैठ गया। कैमल ब्रदर नदी की ओर चल पड़ा। कैमल ब्रदर नदी के गहरे पानी में धीरे धीरे जाने लगा।

सियार बोला, कैमल ब्रदर ज्यादा गहरे पानी में मत जाओ। लेकिन ऊंट सियार की न सुनकर गहरे पानी में जाकर डुबकी लगाने लगा। सियार बोला “अरे …रे….. कैमल ब्रदर! क्या करते हो, मै पानी में बह जाऊंगा। ऊंट ने जवाब दिया। भाई , बहो या रहो। मुझसे तो पानी देखकर तैरे बिना नहीं रहा जाता यह कहकर ऊंट ने फिर डुबकी लगाई और एक पानी के झोके से सियार डूबने लगा। वह ऊंट को चिल्हाकर पुकारने लगा।  मगर ऊंट ने उनकी तरफ देखा भी नहीं।

सार | gist 

जैसा बोएंगे वैसा पायेंगे। दोस्ती हो तो, सुदामा और कृष्ण जैसी।

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