Biography of Dr. Panjabrao Deshmukh:डॉ.पंजाबराव देशमुख की जीवनी

Biography of Dr. Panjabrao Deshmukh:डॉ.पंजाबराव देशमुख की जीवनी, Family life of Dr. Panjabrao Deshmukh:डॉ.पंजाबराव देशमुख का पारिवारिक जीवन 

विदर्भ के शिक्षण शिल्पकार और भारत के कृषि क्रांति के अग्रदूत ” डॉ.पंजाबराव देशमुख ” विदर्भ का शैक्षणिक विकास, भारत की खेती, किसान और बहुजन आंदोलन का इतिहास लिखते समय, भाऊसाहेब का नाम ‘स्वर्ण शब्द’ में लिखा जाएगा। इनके कामयाबी की यशोगाथा एक ‘सामाजिक विचार’ से एक सफल ‘कृषि राजनेता’ तक का सफर कैसे रहा, ऎसे महान आत्मा के बारे में आज हम जानेंगे।

 Biography of Dr. Panjabrao Deshmukh:डॉ.पंजाबराव देशमुख की जीवनी

दिन, दलित, दुःखियों के उद्धारकर्ता, माता पिता का पैसा खत्म हुआ कि सबसे पहले युवावर्ग भाऊसाहेब के तरफ जाते थे और श्रद्धानंद छात्रावास में रहकर पढ़ाई करेंगे, कॉलेज में दाखिला नहीं मिला तो शिव संस्था है इस तरह का आत्मविश्वास भाऊसाहेब के बारे में युवा वर्ग रखता था। गरीबआदमी और बहुजन के पालनहार याने की ” डॉ.पंजाबराव देशमुख ”। Biography

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डॉ.पंजाबराव देशमुख परिचय | Dr. Panjabrao Deshmukh introduction

नाम :- डॉ.पंजाबराव ( भाऊसाहेब ) देशमुख Biography

जन्म स्थल :- पापड़, अमरावती जिला (महाराष्ट्र )

जन्म दिनांक :- 27 दिसंबर 1898

पिताजी का नाम :-  शामरावबापू

माताजी का नाम :- राधाबाई

शिक्षण :-  पीएचडी (ऑक्सफोर्ड विद्यापीठ)

डॉ.पंजाबराव देशमुख का पारिवारिक जीवन | Family life of Dr. Panjabrao Deshmukh

डॉ.पंजाबराव देशमुख (भाऊसाहेब) का जन्म 27 दिसंबर, 1898 को अमरावती जिले के ‘पापड़’ गाँव में किसान परिवार में हुआ था।भाऊसाहेब ने पापड़ गाँव में कक्षा तिसरी तक पढ़ाई की। चौथी कक्षा के अध्ययन के लिए, उन्हें चंदुर रेलवे के प्राथमिक विद्यालय में भर्ती कराया गया। उनकी माध्यमिक शिक्षा कारंजा (लाड ) में हुई। उन्होंने अमरावती के हिंदू हाईस्कूल से मैट्रिक पास किया। भाऊसाहेब ने पुने  के फगर्यूसन कॉलेज से इंटरमीडिएटर तक शिक्षा ली। उच्च शिक्षा के लिए वे 1920 में इंग्लैंड गए। वेद वाङ्मय का धर्म की उत्पत्ति और विकास उन्होंने इस ग्रंथ को लिखा और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। वे गरीबों के दुःख दूर करनेवाले डॉक्टर और पिछड़े दबे कुच्छले लोगो के अन्याय को दूर करने के लिए लड़ने वाले बैरिस्टर बन गए।

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डॉ.पंजाबराव देशमुख के ऐतिहासिक कार्य | Historical work of Dr. Panjabrao Deshmukh

भाऊसाहेब देशमुख और कर्मवीर भाऊराव पाटिल दोनों ही महाराष्ट्र के शिक्षा शिल्पकार हैं। प्राचीनकाल  से शिक्षा पर उच्चवर्णीय का कब्जा रहा है। महात्मा ज्योतिराव फुले ने पहली महिला शिक्षा शुरू की। महिलाओं और शूद्रों को शिक्षा का अधिकार नहीं था। उनके लिए प्राथमिक शिक्षा आवश्यक है। इन कार्यों के लिए, राजश्री शाहू महाराज जैसे महान प्रतिष्ठित लोगों ने स्कूल खोला और बहुजन शिक्षा को प्रोत्साहित किया। कर्मवीर भाऊराव पाटिल ने एक रैयत शिक्षा संस्थान खोला और शिक्षा के प्रवाह को पश्चिम महाराष्ट्र में घर तक पहुंचाया। इन्ही कार्यो को डॉ पंजाबराव देशमुख (भाऊसाहेब) पूर्व महाराष्ट्र में किया।

1931 में भाऊसाहेब ने अमरावती में शिवाजी शिक्षण संस्थान की स्थापना की। यह कॉलेज सुरवती दौर में कचरा कॉलेज के नाम से प्रख्यात थी।  आज, यह संस्था 154 से अधिक संस्थानों का संचालन कर रही है और आज के तारीख में महाराष्ट्र में सबसे आगे है।  जिसमें कॉलेज, हाई स्कूल, चाइल्ड टेम्पल, प्राइमरी स्कूल, ट्रेनिंग सेंटर, एक्सरसाइज स्कूल, हॉस्टल, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग और एग्रीकल्चर स्कूल शामिल हैं।इनमें से कई संस्थान सबसे आगे हैं और लाखों-करोड़ों की संपत्ति बन गई है।वर्ष 1950 में राष्ट्रपति डॉ.राजेंद्र प्रसाद ने सार्वजनिक विश्वविद्यालय का उद्घाटन किया।1960 में, उसी वर्ष, विक्रमादित्य भाऊसाहेब ने 7 महाविद्यालयों की स्थापना की और इसी वर्ष रसिया का प्रवास किया। Biography of Dr. Panjabrao Deshmukh Biography 

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भारत के कृषि क्रांति के अग्रदूत | Forerunner of the Indian Agricultural Revolution

किसान के नेता बहुत है लेकिन किसान के आँसू पोंछनेवाले, उनका दर्द समझने वाले बहुत कम मिलते है। भाऊसाहेब किसानों और शोषितों के उद्धारकर्ता थे। सन 1930 में भाऊसाहेब वराड़ (मध्यप्रदेश) के शिक्षण व कृषिमंत्री बने। सन 1931 में उन्होंने कर्जलवाद अधिनियम पारित किया। किसानों को सावकरी कर्ज से मुक्त किया। भाऊसाहेब वर्ष 1952-62 में भारत के कृषि मंत्री थे। इस कालखंड के दौरान कृषि और कृषको के लिए क्रांतिकारक कार्य किये। पंजाब के किसान भाऊसाहेब को ”पंजाबराव पंजाब” के कहने लगे।

सन 1955 में भाऊसाहेब ने ” भारत कृषक समाज ” की स्थापना की। 1959 में, दिल्ली के “विश्व कृषि प्रदर्शनी” में भाऊसाहेब को डॉ. राजेंद्र प्रसाद, पंडित जवाहरलाल नेहरू आदि द्वारा किया गया था। भाऊसाहेब मधुमक्खी पालन, खाद्य भंडारण, कृषि मशीनरी, राष्ट्रीय कृषि सहकारी क्रय संघ, भारतीय कृषि सहकारी परिषद जैसे कई संगठनों के संस्थापक और अध्यक्ष थे। जापानी धान की खेती में उनका उपयोग उल्लेखनीय है। भाऊसाहेब कृषि विद्यापीठ कल्पना के जनक थे। इसलिए ” पंजाबराव कृषि विश्वविद्यालय” का नाम विदर्भ के कृषि विश्वविद्यालय के लिए सार्थक है।

 घटना परिषद | Event council

भाऊसाहेब 1946 में इवेंट काउंसिल के सदस्य बने। डॉ.बाबासाहेब अम्बेडकर ने उनके काम को सम्मानित किया। शिक्षण, कृषि, सहकार, अस्पृश्यता उद्धार, जाती भेद निर्मूलन जैसे अनेक क्षेत्रो में भी योगदान दी।भाऊसाहेब ने जापान, चीन, रूस, अमेरिका आदि देशों का भी दौरा किया और अपने कई संगठनों का नेतृत्व भी किया।

महाराष्ट्र का पहला मंदिर प्रवेश सत्याग्रह | Maharashtra’s first temple entrance satyagraha

13 और 14 नवंबर 1927 को डॉ.बाबासाहेब और भाऊसाहेब के माध्यम से अमरावती में मंदिर प्रवेश के लिए परिषद बुलाई गई थी। मंदिर के लिए प्रवेश चालू हुआ। यह महाराष्ट का पहिला मंदिर प्रवेश सत्याग्रह था।

2 मार्च 1930 में डॉ.बाबासाहेब ने नाशिक का कालाराम मंदिर सत्याग्रह किया था।

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