Biography of the great scientist Tycho Brahe:वैज्ञानिक टायको ब्राहे की जीवनी

Biography of the great scientist Tycho Brahe:महान वैज्ञानिक टायको ब्राहे की जीवनी,Specialty of Tycho Brahe:’टायको ब्राहे की खास बातें 

Biography of the great scientist Tycho Brahe:वैज्ञानिक टायको ब्राहे की जीवनी

 

आकाशगंगा, ग्रह, सितारे और धरती निर्माण आदि ने मानवजाति को आकर्षित किया है। अंतरिक्ष में यान के माध्यम से ग्रह, सितारों के करीब भेज कर उसका अभ्यास वैज्ञानिक करते रहते है। ग्रह, सितारों का अभ्यास करने में डेनिश खगोलशास्त्रज्ञ ‘टायको ब्राहे’ अग्रदूत थे।

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 Introduction to Tyco Brahe|टायको ब्राहे का परिचय 

टायको ब्राहे का जन्म 14 दिसंबर 1546 को डेनिश सरदार घराने में हुआ। उसके अध्यन की जबाबदारी उसके काका ने ली थी। कानून और तत्वज्ञान का अध्यन पूरा होने के बाद टायको राजनिति में प्रवेश करनेवाले थे लेकिन उन्हों ने सन 1560 में सूर्यग्रहण देखा और उन की रूचि खगोलविज्ञान में निर्माण हुई और गणित और खगोलशास्त्र का अभ्यास किया।

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”टायको ब्राहे” की खास बातें | Specialty of “Tycho Brahe”

सन 1563 में गुरु और शनि का अभ्यास टायको ने किया तभी उनके ध्यान में आया की उस समय के नक्षत्रों के स्तंभ परिपूर्ण नहीं थे।

सन 1572 में टायको ने नक्षत्रों के अभ्यास से बावन पन्नों की ” नए तारे ” नाम की बुक प्रसिद्ध किये। टायको ने यह सिद्ध करके दिखाया की, ” नया तारा धीरे-धीरे चमकदार होते होते शुक्र से भी तेज हुआ और सुमारे देढ़ साल के बाद उसके प्रकश की गति कम होकर बराबर नहीं दीखता गायब होता है इस तरह से नए तारों का निर्माण नहीं होता और बराबर नहीं दिखनेवाले कुछ तारों का स्फोट होता है उनका प्रकाश तेज होता है और हमें दीखते है। ”

स्फोट होनेवाले तारों को Nova नाम से जानने लगे। नोव्हा चंद्र से बहुत दुरी पर रहते है यह टायको ने सिद्ध किया इसलिए टायको का नाम विश्व के खगोलशास्त्रज्ञों में प्रसिद्ध हुआ।

डेन्मार्क का राजा द्वितीय फ्रेडरिक ने ” टायको ब्राहे ” को राजाश्रय दिया। उसके बाद टायको ने खगोल वेधशाला का निर्माण किया और खगोलशास्त्रज्ञ अनुसंधान के लिए आने लगे।

सन 1577 में धूमकेतु का अंतरिक्ष में आगमन हुआ। टायको ने उसका अध्यन किया और सिद्ध करके दिखाया की, धूमकेतु के घूमने की दिशा गोलाकार न होकर लंब गोलाकार है।

वर्ष की समय सीमा ठहराते समय मात्र एक सेकंद से गलत हुआ था।

सन 1597 को टायको ब्राहे जर्मनी का सम्राट द्वितीय रेडाल्फ का निमंत्रण स्वीकार करके जर्मनी के प्राग में स्थायिक हुआ। उन्हें योहान केप्लर मिला उसे ग्रह ज्योतिष का ज्ञान दिया और वे टायको ब्राहे के सानिध्य में काम करने लगे।

मृत्यु | Death

डेनिश खोगलशास्त्रज्ञ ” टायको ब्राहे ” का मृत्यु 24 सितंबर 1601 में हुआ।

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