Biography of Dr.Raja Ramanna | डॉ.राजा रामण्णा की जीवनी

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भारत ने 18 में 1984 को सुबह 8 बजके 5 मिनिट पर भारत ने राजस्थान के पोखरण रेखिस्तान में पहली भूमिगत अनु की चाचणी सफल किया और विश्व के पांच प्रमुख बढे राष्ट्र को पीछे किया। इस ऐतिहासिक घटना को आगे पढ़ाते हुए परमाणु ऊर्जा आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ.राजा रामण्णा के नेतृत्व में वैज्ञानिक की एक तुकडी बहुत दिनों से काम कर रही है Biography of Dr.Raja Ramanna.

Biography of Dr.Raja Ramanna | डॉ.राजा रामण्णा की जीवनी

पोखरन अनु चाचणी सफल होने के बाद डॉ.राजा रामण्णा का नाम विश्व में प्रख्यात हुआ। भारत के परमाणु कार्यक्रम के पितामह डॉ.होमी जहाँगीर भाभा की तरफ से पद का स्विकार किया था।

भारत में एक मेगावॉट क्षमता की पहली अणुभट्टी ‘ अप्सरा ‘ 1956 में बनाई गयी। इस अणुभट्टी में राजा रामण्णा का योगदान था। अप्सरा अणुभट्टी के निर्माण में रामण्णा ने न्यूट्रॉन तापमान का अभ्यास किया इस कारण ज्यादा तापमान पर न्यूट्रॉन पुंज मिला उसके बाद उन्हों ने यूरेनियम 235 के अनुभंजन कार्यक्रम की आधारशिला बनाया। पोखरण अनुचाचणी होने के पहले रामण्णा न्यूक्लिअर विज्ञान और ज्यादा तापमान पर कार्य करने के न्यूट्रॉन के अनुसंधान के लिए प्रसिद्ध थे।1964 में अनुभंजन के स्टोकस्टिक थेअरी के नए सिद्धांत की खोज किया था Biography of Dr.Raja Ramanna.

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डॉ. राजा रामण्णा का परिचय | Introduction to Dr. Ramanna

  • नाम : डॉ.राजा रामण्णा
  • जन्म दिनांक : 28 जनवरी 1925
  • जन्म स्थल : तमकुर
  • पिताजी का नाम : बी. रामण्णा
  • माताजी का नाम : रुक्मणि मलाथी
  • रुचि : पियानो बजाना

डॉ.राजा रामण्णा की प्राथमिक पढ़ाई म्हैसूर और बैंगलोर में हुई। उन्हें पियानो बजाने का शौक था। विज्ञान के साथ-साथ आध्यात्म और संगीत में रूचि थी। मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से भौतिकशास्त्र, गणित और रसायनशास्त्र आदि विषय में विज्ञान में पदवी प्राप्त किए थे। सन 1952 में टाटा उद्योग समूह से स्कॉलरशिप लेकर इंग्लैंड को पढ़ाई के लिए गए। 1954 में उन्हों ने लंदन के किंग्ज कॉलेज से आचार्य की (डी.एससी ) डॉक्टरेट पदवी प्राप्त की।

भारतीय अणुभट्टी के जनक | Generator of Indian reactor

डॉ. रामण्णा का समावेश भारत के श्रेष्ठ वैज्ञानिकों में होता है। 1953 में मुंबई परमाणु संशोधन केंद्र का पदभार स्वीकार करने के बाद उसका परिचय डॉ. होमी भाभा के साथ हुआ। जनवरी 1966 में डॉ.भाभा के मृत्यु के बाद परमाणु संशोधन केंद्र का नाम भाभा ऑटोमिक रिसर्च सेंटर रखा गया और डॉ. रामण्णा की संचालक पद पर नियुक्ति हुई। संस्था में कार्य करते समय रामण्णा ने अप्सरा, ध्रुव और फ़ास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएटरकी निर्मिति करके दिखाया।

रामण्णा भौतिकशास्त्र के अभ्यासक थे इस कारण परमाणु विखंडन के ज्ञान का तात्त्विक फायदा भारत को मिला। अनुसंधान रिएक्टर निर्माण और संचालन में भारत आत्मनिर्भर बना है इसका श्रेय डॉ.रामण्णा को ही ज्याता है। भारता में 40 मेगावॉट की दूसरी अणुभट्टी 1966 में साइरस में स्थापन की गई। यह अणुभट्टी कैनडा-इंडिया रिएक्टर यूटिलिटी सर्व्हिस Canada India Reactor Utility Service-Cirus के प्रकल्प के माध्यम से हुई  अणुभट्टी के कारण आइसोटोप्स भारत में निर्माण होने लगा। अप्सरा और साइरस के व्यतिरिक्त जरलिना, पुर्णिमा, ध्रुव, कमीनी आदि परमाणु भट्टियाँ है।

वैज्ञानिक कॅरियर | Scientific career 

सन 1953 में डॉ.राजा रामण्णा ने भाभा अनुविज्ञान संशोधन केंद्र, मुंबई के संस्था में ‘ अनु वैज्ञानिक ‘ के पद पर काम करने लगे। इस संस्था में प्रशिक्षण केंद्र चालू किये और केंद्र के माध्यम से अनुविज्ञान में विशेतज्ञं की एक चमु प्रशिक्षित किये। इस केंद्र के माध्यम से प्रति वर्ष 200 तरुण वैज्ञानिक और इंजीनियर को लाभ मिला। डॉ.भाभा के मृत्यु के बाद भारत के परमाणु कार्यक्रम की जबाबदारी डॉ. विक्रम साराभाई को मिली। डॉ. विक्रम साराभाई का अकाली मृत्यु दिसंबर 1971 में हुआ। उसके बाद डॉ.रामण्णा के तरफ भारत के अनुविज्ञान और अंतरिक्ष कार्यक्रम की जबाबदारी दी गई। 

सन 1985 में डॉ.रामन्ना के सौजन्य से भारत में परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड की स्थापना हुई। भारत के उपग्रह कार्क्रम की आधारशिला निर्माण किया। डॉ.राजा रामण्णा ने डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम के सॅटॅलाइट लैंडिग व्हिकल-एस.एल.व्ही-3 आदि प्रोजैक्ट का संचालक बनाया गया।

डॉ.कलाम के नेतृत्व में त्रिशूल, पृथ्वी, अग्नि, नाग, आकाश आदि उपग्रह की मालिका निर्माण किया। डॉ.रामन्ना के परिश्रम से भारत विश्व का महत्वपूर्ण उपग्रह शक्ति बना।

Award | पुरस्कार : Biography of Dr.Raja Ramanna
  • शांतिस्वरूप भटनागर पुरस्कार, 1963
  • पद्मश्री, 1968
  • पद्मभूषण, 1973
  • पद्मविभूषण, 1975
  • नेहरू अवार्ड फॉर इंजीनियरिंग अण्ड टेक्नोलॉजी, 1983

सन 1990-92 में भारत सरकार के सरंक्षण राज्य मंत्री की सेवा प्रदान की, राज्यसभा सदस्य भी रहे।

मृत्यु | death  

डॉ.राजा रामण्णा का निधन मुंबई हॉस्पिटल में 24 सितंबर 2004 को उम्र के 79 वे साल में हुआ।

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