Pārijāta vr̥kṣa kē bahuguṇi labha:पारिजात वृक्ष के बहुगुणी लाभ

Pārijāta vr̥kṣa kē bahuguṇi labha:पारिजात वृक्ष के बहुगुणी लाभ, parijaat vrksh ke aushadhiyukt gun:पारिजात वृक्ष के औषधियुक्त गुण 

आज पारिजात वृक्ष के बहुगुणी लाभ  की जानकारी इस लेख (Article) के माध्यम से आपको मिलनेवाली है। हम आज आपके साथ शेयर करेंगे पारिजात वृक्ष की जानकारी, पुष्प शुद्धता और पवित्रता का प्रतिक माना जाता है। पारिजात का वृक्ष दिखने में अलौकिन प्रतीत होता है।

Pārijāta vr̥kṣa kē bahuguṇi labha:पारिजात वृक्ष के बहुगुणी लाभ

पौराणिक कथा के नुसार पारिजातक का वृक्ष समुद्र मंथन से निकले हुए 14 रत्नों में से एक रत्न याने की, ‘ पारिजातक ‘ वृक्ष। इस वृक्ष को भगवान इंद्र ने अपने साथ स्वर्गलोग ले गया था। पारिजातक का पुष्प देवताओं का प्रिय पुष्प है। रुक्मिणी-सत्यभामा के कथा ने इस पुष्प को अजरामर किया है। इस पुष्प को संस्कृत साहित्य और पुराणों में बहुत ही महत्व है। पारिजात  वृक्ष को देवताओं का वृक्ष कहा जाता है।

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पारिजात वृक्ष की खास बाते:

दोस्तों जानते है, पारिजात वृक्ष की विस्तार से जानकारी पारिजात वृक्ष हमारे भारत देश में बहुत मौजूद है। लेकिन आज उत्तर प्रदेश में मौजूद पारिजात वृक्ष के बारे में जानेंगे। पारिजात का वृक्ष उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के किन्नुर गांव में मौजूद है। पौराणिक कथा के नुसार पांडव अपने माता के साथ अज्ञातवास के लिए उत्तर प्रदेश के किन्नुर गांव में आये थे, उस समय पांडवों की माता कुंती ने सत्यभामा के वाटिका से पारिजात के वृक्ष को अपने साथ लाई थी और आज पारिजात का वृक्ष किन्नुर गांव में मौजूद है।सत्यभामा पारिजात के पुष्प से भगवान शिव की पूजा करती थी। इस जगह पर कुंतेश्वर महादेव मंदिर प्रस्थापित है। इसकी कथा आपको पौराणिक कथा में विस्तारीत रूप से बताई जाएगी। …..  Pārijāta  

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पौराणिक कथा:Mythology

1. एक समय की बात है, देवऋषि नारद स्वर्गलोग से पारिजात वृक्ष के पुष्प लेकर श्रीकृष्ण को दिया और श्रीकृष्ण ने अपनी भार्या रुक्मिणी को दिया। उसके बाद देवऋषि नारद श्रीकृष्ण की दूसरी भार्या सत्यभामा के पास गए और उन्हें बताने लगे की, स्वरलोग से लाए गए पारिजात के पुष्प श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी को दे दिया। इस बात पर सत्यभामा बहुत नाराज हुई।

श्रीकृष्ण को कहने लगी की, आप पारिजातक का वृक्ष स्वर्गलोग से मेरे लिए लाइए, श्रीकृष्ण बोले, ‘ देवी स्वर्गलोग से पारिजातक का वृक्ष नहीं ला सकते श्रीकृष्ण ने सत्यभामा को बहुत समजाया लेकिन सत्यभामा समजने को तयार नहीं थी और अपने जिद पर अटल रही, तभी भगवान श्रीकृष्ण ने अपने सेनापति को पारीजात वृक्ष के लिए स्वर्गलोग भेजा लेकिन इंद्रदेव ने पारीजात वृक्ष देने से इंकार कर दिया।

यह बात सेनापति ने भगवान श्रीकृष्ण को बताया और स्वयं श्रीकृष्ण स्वर्गलोग पारीजात वृक्ष लानेके लिए गए लेकिन इंद्रदेव के साथ युद्ध करना पड़ा। इस तरह से ” पारिजात ” का वृक्ष भगवन श्रीकृष्ण ने सत्यभामा के  वाटिका में लाया लेकिन इंद्रदेव ने नाराज होकर शाप दिया इसिलिय पारिजात वृक्ष को फल नहीं लगते। जब ” पारिजात ” वृक्ष को पुष्प लगते है, पुष्प पेड़ के निचे गिरना चाहिए लेकिन पेड़ के कुछ दुरी पर पुष्प गिरते है, इसका मतलब सभी पुष्प सत्यभामा के वाटिका में जाते है। Pārijāta  

2. ” पारिजात ” नाम की एक राजकुमारी थी। राजकुमारी सूर्य देव से विवाह  करना चाहती थी। लेकिन सूर्य देव ने विवाह के लिए इन्कार किया इस बात से नाराज होकर राजकुमारी ” पारिजात ” ने आत्महत्या की। उसी जगह पर ” पारिजात ” का वृक्ष निर्माण हुआ।

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पारिजात वृक्ष के औषधियुक्त गुण : parijaat vrksh ke aushadhiyukt gun

  • मलेरिया (हिवताप) के रोगी को पारिजात के पत्तियों का 1 चमच अर्क, 1 चमच अजवाइन पाउडर और आधा चमच शहद मिलाकर देना चाहिए, आराम मिलता है।
  • जोड़ों के दर्द के लिए पारिजात के पत्तियों का अर्क, अदरक का अर्क खड़ीशक़्कर के साथ लेने से आराम मिलता है।
  • गजकर्ण, फुंसी आदि के लिए पारिजात का बीज पीस कर लगाने से और पत्तियों का अर्क शहद के साथ पिने से आराम मिलता है।
  • पारिजात का अर्क यकृत विकार, पित्तविकार, अर्श (files) और कृति जीर्णज्वर के लिए उपयुक्त है।
  • पारिजात के पत्तियों का काढ़ा कमर दर्द के लिए लाभकारी है।
  • वात और बालों के लिए पारिजात के पुष्प लाभकारी है।
  • पारिजात के पत्तियों का अर्क पिने से खून साफ होता है।
  • पत्तियों का लेप घाव का दर्द, सूजन आदि पर लगाने से दर्द जल्द ही भरता है।
  • पारिजात तेल और नारियल तेल की 5-5 बुँदों का मिश्रण कीजिए थोड़ा गरम कीजिए और जोड़ों का दर्द, सूजन पर मालिश करे, जल्द ही आराम मिलेगा।
  • पारिजात के पत्तियों का लेप टूटी हुई हड्डियों पर लगाने से हड़िया बहुत ही जल्द जुड़ती है और मजबूत होती है।
  • सायटिका (कमर से लेकर पैर का दर्द) के रोगी को पारिजात के पत्तियों का काढ़ा बनाकर पिने से आराम मिलता है।
  • बवासीर जैसे बीमारी से आराम पाने के लिए  पारिजात के बीज का सेवन करते रहना चाहिए।
  • ह्रदय विकार बाधा पारिजात के फूल का सेवन करने से टलजाती है।
  • पारिजात का तेल बहुत ही उपयोगी है, इसे चेहरे पर लगाने से दाग-धब्बे और चेहरा निखरता है।
  • पारिजात के पुष्प का रस पिने से बाल लम्बे, घने और मजबूत बनते है, बेजान बाल खिले-खिले दीखते है।
  • खासी के लिए, पत्तियों का रस देने से आराम मिलता है।

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