Holy Basil:पवित्र तुलसी (medicinal properties of basil-औषधीय गुण)

Holy Basil:पवित्र तुलसी (medicinal properties of basil-औषधीय गुण), Tulsi Vivah:तुलसी विवाह, Mythology:पौराणिक कथा, Types of basil:तुलसी के प्रकार.

तुलसी को भारतीय संस्कृति में बहुत ही पवित्र और श्रेष्ठ स्थान दिया गया है। भगवन श्रीकृष्ण और तुलसी इनका बहुत ही महत्वपूर्ण रिस्ता है, इसलिए कार्तिक माह में तुलसी विवाह किया जाता है। गौमाता, गंगामाता ,भगवतगीता,गायत्रीमाता की तरह तुलसी को पूजनीय स्थान है। तुलसी को धार्मिक महत्व है उसके साथ-साथ औषधिय गुणधर्म भी है।

Holy Basil:पवित्र तुलसी (medicinal properties of basil-औषधीय गुण)

तुलसी के मानवजाति पर बहुत उपकार है क्यों की, पत्तिया,फूल, टहनियाँ, तुलसी का पेड़ ही मानवजाति के लिए गुणकारी है, इसीलिए सभी के आँगन में तुलसी वृद्धावन की प्रथा चालू हुई है। तुलसी की पूजा, प्रदक्षिणा और जिस के आँगन में तुलसी लगी हो उस घर का वातावरण शांत और शुद्ध प्राणवायुव मिलता है। तुलसी के बराबर निसर्ग का डॉक्टर कोई दूसरा नहीं हो सकता। सभी ने अपने-अपने आँगन में तुलसी का पेड़ लगाना चाहिए और पढ़ते हुए प्रदूषण (Pollution) को कम करना चाहिए। Holy Basil

अमृतो मृतरूपसि अमृतत्व प्रदायिनी !

त्व मामामुद्धर संसारत क्षीरसागार कन्यके  !!

अर्थ – विष्णुप्रिये आप अमृत स्वरुप हो, अमृत प्रदान करते हो, इस संसार में हमारा उद्धार होना चाहिए। इसलिय तुलसी का माहत्म्य देखना बहुत ही जरुरी है। लेकिन इस तुलसी को धार्मिक महत्व के साथ-साथ, औषधिय गुणों के लिए तुलसी बहुत ही गुणकारी है। तुलसी के पत्तियों से लेकर जड़ तक सभी अंगों में औषधिय गुण पाए जाते है,पर्यावरण का प्रदुषण नष्ट करके शुद्ध प्राणवायु प्रदान करती है।

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तुलसी विवाह | Tulsi Vivah

भगवान श्रीकृष्ण और तुलसी का महत्वपूर्ण वर्णन किया गया है, इसलिए कार्तिक शुद्ध एकादशी से पूनम तक तुलसी विवाह मनाते है। तुलसी वृंदावन सजाया जाता है, गन्ना, गेंदे के फूलों का मंडप बनाया जाता है, तुलसी के पास बेर, इंबली, आवला रखा जाता है, इसलिए मराठी में कहावत है, ” बोर भाजी आवळा कृष्ण देव सावळा ” विवाह के लिए आजुबाजु के लोगों को बुलाया जाता है, विवाह के पांच श्लोक बोले जाते है, सैनाई बजाई जाती है और आए हुए बारातियों को प्रसाद और फराळ दिया जाता है। तुलसी विवाह की पौराणिक कथा कुछ इस तरह  पुराणों में बताई गई है। …… Holy Basil

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पौराणिक कथा | Mythology

जालंधर नाम का एक राक्षस था और उसकी वृन्दा नाम की भार्या थी। जालंधर की भार्या पतिव्रता थी, पतिव्रता के तेज के कारण जालंधर ऋषि-मुनि, देव-भगक्तगण आदि को मारने लगा। सभी ऋषि-मुनि, देव आदि राक्षस के कारन त्रस्त हो गए और भगवान विष्णु के शरण में जाने लगे, भगवन हमें बचाओं जालंधर राक्षस हमें बहुत ही त्रस्त कर रहा है। इसका निराकरण करने के लिए भगवान विष्णु को उसकी भार्या वृन्दा का पातिव्रत्य भंग करने पर ही जालंधर का विनाश संभव था, इसलिए भगवान विष्णु ने जालंधर का अवतार लेकर वृन्दा का पातिव्रत्य भंग किया और जालंधर का वध किया। Holy Basil

इसकी जानकारी वृन्दा को पता चलने पर उसने अग्नि में अपना देह जला दिया, यह देखकर भगवान विष्णु को अच्छा नहीं लगा भगवान विष्णु मन के मन में बहुत ही दुखी हुए। उस समय पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती ने भगवान विष्णु को धात्री, मालती और तुलसी के छोटे पेड़ दिए। तुलसी का पेड़ लेकर के भगवान विष्णु वैकुंठधाम गए। वृन्दा याने की, तुलसी विष्णु को प्रिय हुई इसलिए तुलसी और श्रीकृष्ण के विवाह की परंपरा चालू हुई है, ऐसा पुराणों में लिखित है। Holy Basil

तुलसी नारी जाती के लिए वात्सल्यसिंधु माता है। सुबह-शाम उसका स्मरण-पूजन करना पुण्यप्रद माना जाता है, इसलिए मराठी में कहावत है, ” दारी तुलस हिरवीगार तिला माझा नमस्कार

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तुलसी के प्रकार | Types of basil 

श्वेत तुलस और कृष्ण तुलस दो जाती की तुलसी पाई जाती है। दोनों मे पत्तियाँ और टहनियाँ का अंतर रहता  है। श्वेत तुलसी की पत्तिया और टहनियाँ हरी रहती है।

कृष्ण तुलसी की पत्तियाँ और टहनियाँ काले रंग की रहती है। कृष्ण तुलसी का उपयोग दवाओं के लिए किया जाता है। कृष्ण तुलसी का पेड़ दवाओं के लिए उपयोग में लाया जाता है। घर में जो तुलसी रहती है, वे तुलसी श्वेत तुलसी है। कपूर तुलसी का सुगंध कपूर जैसा आता है।

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तुलसी के नाम | Name of Tulsi

1. भूतघ्नी अपेत राक्षसी, 2.पापघ्नी, 3.फूल-पात्री, 4.तीव्रा वकायस्था, 5.सरला, 6 इंग्रजी में – होली बेसिल (Holy Basil), 7.फ्रेंच में- बेसेछिक सेंद, 8. संस्कृत में -वृन्दा,अमृता, सुगंधा, 9. हिंदी में- तुलसी, 10. मराठी में – तुळस

तुलसी को धार्मिक महत्व के साथ-साथ आज के विज्ञान युग में वायुमंडल दूषित हुआ है और वायु प्रदूषण से बहुत बड़ा संकट विश्व पर आया है। नई-नई बीमारिया निर्माण हो रही है। शुद्ध हवा मिलना बहुत ही कठिन हुआ है। तुलसी सभी का रक्षण कर सकती है, अपने आँगन में तुलसी लगाकर शुद्ध हवा ले सकते है, इसलिए एक कहावत है ,” तुलसी लगावो-प्रदुषण भगाओं ”

नारी शक्ति नतीनियम से सुबह-शाम तुलसी को पानी डालके प्रदक्षिणा लेते है। तुलसी के कारण हवा शुद्ध होती है और नारी शक्ति तुलसी की प्रदक्षिणा लेकर के हवा शुद्ध लेते है।

तुलसी से औषधी बनाई जाती है, ” चरक वैद्यकशास्त्रज्ञ ने कहा है की, तुलसी दमा, खोकला, हिचकी आदि के लिए लाभकारी है। धनवंतरि ने अपने निघंटु ग्रंथ में कहा है की, जो लोग तुलसी की पत्तिया निगलते (चबाकर खाना नहीं ) रहते है उनकी पाचनक्रिया अच्छी रहती है।

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Information about medicinal properties of basil:तुलसी के औषधीय गुणों की जानकारी 
  • तुलसी का स्वाद थोड़ा तिखा, तुरट और रुचिकर रहता है, पित्त, वात और कफ आदि रोगों को कम करती है।
  • तुलसी दवा और आरोग्यवर्धक है, तुलसी के 11 पत्ते हर दिन सुबह खाने से सर्दी-पाचनक्रिया जैसे विकार साफ होते है।
  • दाढ़ दर्द होती हो तो, तुलसी के पत्ते का रस और कपूर निम्बू के रस में गोली बनाकर दाढ़ में दबाकर रखे।
  • तुलसी के कारण ओझोन वायू दूर होता है और हमारे घर के आजुबाजु का परिसर शुद्ध रहता है।
  • रशियन औषधतंज्ञ ने तुलसी से हजारों दवाइयाँ बनाया है, कैंसर जैसे रोग के लिए भी तुलसी के रस का उपयोग किया जाता है।
  • तुलसी उत्तम कृमिनाशक (अतड़ियों के कीड़ों को मारनेवाली दवा) पैर की चखली, गजकर्ण, ख़रूज आदि त्वचा विकार के लिए तुलसी का रस और निम्बू का रस मिलाकर लगाने से आराम मिलता है।
  • सर्दी, खोकला और बुखार एकसाथ आनेपर तुलसी  सेवन करना चाहिए, या तो 11 पत्तिया निगलना चाहिए।
  • ” त्रिभुवनकीर्ति ” की गोलियाँ सहद अथवा खडीशक़्कर के साथ खाने से आराम मिलता है।
  • मलेरिया के रोगी के लिए, तुलसी, मिरि और गुळ मिलाकर कड़ा बनाकर उसमे निम्बू का रस डालके रोगी को थोड़ा गरम-कोहमट काढ़ा पिलाना उसके बाद उसे ओढ़ के सोने को बताना कुछ देर में उसे पछीना निकलेगा और उसका मलेरिया का बुखार खुल जाएगा।
  • सर्दी, कप पड़से इस विकार पर तुलस की पत्तिया, सूट, अदरक ,गुळ. मिरि मिलाकर काढ़ा बनाकर पीना चाहिए। तुलसी का रस सहद के साथ लेने से सर्दी, खोकला आदि को आराम मिलता है। तुलसी कफ नाशक है।
  • तुलसी के बीज की खीर पोष्टिक और बलवर्धक रहती है, वीर्य शुद्ध करती है।
  • तुलसी रस और निम्बू रस में सूट पावडर मिलाकर देने से पेट दर्द कम होता है।
  • कान  में दर्द होता है तो, तुलसी का रस बूंद-बूंद कान में डालना चाहिए।
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  • तुलसी का रस खड़ीशक़्कर के साथ लेने से भूख अच्छी लगती है।
  • कोई इसम बेहोश होता है तो उसे तुलसी के रस में सेंध नमक मिलाकर एक-एक बूंद नाक में डालना बेहोश इसम को होश आएगा।
  • मुँह को छाले आनेपर तुलसी के पत्ते और चमेली के पत्ते एकसाथ निगलने से छाले कम होते है।
  • जले हुए और कटे हुए दर्द पर तुलसी के पत्ते का रस खोबरेल तेल में लगाने से दर्द कम होता है।
  • मुँहासे के लिए तुलसी का रास और निम्बू का रस मिलाकर रात में लगाकर सो जावो सुबह उठकर उसे पानी से धो ले कुछ दिनों में मुँहासे गायब हो जायेंगे। तुलसी के पत्ते का लेप बनाकर चेहरे पर लगाए और सुबह धो ले चेहरा निखरने लगेगा।
  • मूत्ररोगी को तुलसी का रस और निम्बू का रस एक साथ मिलाकर देने से पेशाब साफ होती है।
  • तुलसी का बीज पीस के सहद के साथ खाने से रक्तातिसार, स्वप्नदोष, प्रमेह आदि धातुसंबंधी विकार दूर होते है।
  • स्त्री को मासिक धर्म के समय रक्तस्त्राव होता होंगा या चक्कर आता है तो, तुलसी के रस में सहद मिलाकर देने से आराम मिलता है।
  • स्मरणशक्ति बढ़ने के लिए सुबह के समय तुलसी के 6 पत्ते पानी के साथ निगलना चाहिए।
  • ह्रदय और मस्तिष्क को शीतल रखने के लिए तुलसी रस अमृत जैसा है। तुलसी से दमा और एलर्जी रोग से बचाव होता है। मलेरिया के जंतु मारने के लिए तुलसी का उपयोग होता है।
  • तुलसी से बनी अगरबत्ती लगाने से घर का वातावरण शुद्ध रहता है।
  • तुलसी एंटीसेप्टिक होने के कारण जखम भरके निकालती है। त्वचापर होनेवाली जखम को तुलसी रस से धोने से जखम जल्द ही ठीक होता है।
  • आषाढ़ी, कार्तिक के वारी में वारकरी तुलसी की माला गले में पहनते है, इस के कारण संसर्गजन्य रोग नहीं होता है।
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