Story of Tungabhadra river:तुंगभद्रा (tungabhadra river information in hindi)

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तुंगभद्रा दक्षिण भारत के कर्नाटक और आंध्रप्रेदश राज्य के लिए जीवनदायनी है। तुंगभद्रा के तट पर रहनेवाले लोग कहते है ” स्नान करना है तो’ गंगा में स्नान करो ” और पानी पीना है तो तुंगभद्रा का पियो ”

 Story of Tungabhadra river:तुंगभद्रा (tungabhadra river information in hindi)

तुंगभद्रा की उत्पति | Origin of Tungabhadra

तुंग और भद्रा दोनों नदियोंका उद्गम कर्नाटक राज्य के ” चकमंगलुर ” जिला के पश्चिम घाट में होता है जिसकी ऊचाई 1200 मीटर है। दोनों नदियों का उद्गम स्थान पास में है लेकिन दोनों नदिया अलग-अलग बहती है, कुछ दुरी पर उनका मिलन होता है और ” तुंगभद्रा ” का निर्माण होता है।

तुंगभद्रा को 6 उपनदिया है, तीन उपनदिया बहुत ही छोटी है और तीन बहुत बढ़ी है, इसमें से तुंग और भद्रा यह दो नदिया है।

आठवे शतक में शंकराचार्य ने हिन्दू धर्म और संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए श्रृंगेरी मठ बनाया। इस मठ के पास से तुंग नदी का प्रवाह बहता है। श्रृंगेरी पीठ से तुंग नदी ” हल्ली ” इस तीर्थक्षेत्र को मिलती है। हल्ली से निकली तुंग नदी पर्वत, झील , चहा के बाग, बास के जंगल को पार करते हूए कूदली  में पहुँचती है, इसी जगह पर तुंग और भद्रा दोनों का मिलन होता है और आगे तुंगभद्रा के नाम से पहचानि जाती है।

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तुंगभद्रा कर्नाटक राज्य में प्रवेश करती है। कुमुदावती और औकबरदा दो उपनदिया मिलती है। इस कारण नदी का प्रवाह बढ़ा होता।

पुरातन कल में प्रसिद्ध क्षेत्र विजयनगरम इस राज्य से तुंगभद्रा बहती है अभी यह प्रदेश बेल्लारी जिला के नाम से पहचाना जाता है। विजयनगरम साम्राज्य की राजधानी विजयनगर तुंगभद्रा नदी के तट पर विराजमान थी। पुरातन काल के अवशेष तुंगभद्रा के तट पर अभी भी मिलते है।

विजयनगर की राजधानी उचे पहाड़ो पर होने के कारण पुरातन काल में खेती को पानी देने के लिए बाँध बनाये गए थे आज भी यह बाँध मौजूत है। पत्थरों से बनाये गए बाँध बहुत ही मजबूत है। खेती को पानी देनेके लिए और बिजली तैयार करने के लिए इस बाँध का उपयोग किया जाता है।

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रायचूर और रॉयल सिमा इस जिले का उद्धार तुंगभद्रा के कारण ही हुआ है। तुंगभद्रा पर मल्लपुरम में बाँध बनाया गया है। इस बांध के पानी से खेती को पानी दिया जाता है और बिजली का निर्माण किया जाता है।

कडप्पा और कर्नूल यह दो नहर के द्वारा बांध का पानी बहुत दूर तक पहुंचाया जाता है। कर्नूल में तुंगभद्र का मिलान कृष्णा नदी से होता है।

भारत के सभी नदियों से तुंगभद्रा का स्थान बहुत ही निराला है, तुंगभद्रा नदी का पानी बहुतही अलग स्वादिष्ट है।

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