Life Story of Paoli Express:पायोली एक्सप्रेस की जीवन कहानी

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पि.टी.उषा का नाम लेते ही मन में कुछ हलचल सी मच जाती है, आँखों के आगे एक रास्ता नजर आता है और उस रास्ते पर पी.टी उषा दौड़ते हुए नजर आती है। पी.टी उषा एक साधारण गरीब घर की लड़की है। प्रतिभा किसी परिस्थिति की मौताज नहीं होती प्रतिभावान इंसान उस सूरज की तरह है जो विश्व को अपने तेज से प्रकाशमय करता है और उसके रोशनी को कोई नहीं रोक सकता ऐसी ही प्रतिभा हमें पी.टी उषा याने की  ”उड़न परी”,”स्वर्ण परी” और ”पायोली एक्सप्रेस” में नजर आती है। पी.टी उषा को 5 सालों तक एशिया की सर्वोत्तम एथलीट बनने का सन्मान प्राप्त हुआ है।

Life Story of Paoli Express:पायोली एक्सप्रेस की जीवन कहानी

पि.टी.उषा का परिचय | Introduction to P.T.

नाम :- पिलावुलकंडी थेकापराम्विल उषा

जन्म तारीख :- 27 जून 1964

जन्म स्थल :- ग्राम – पायोली,जिला – कोझिकोड ( केरल )

पिताजी का नाम :- पैठल

माताजी का नाम :- लक्ष्मी

पति का नाम :- श्रीनिवासन

पी.टी. उषा का बेटा :- उज्ज्वल

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पी.टी उषा के पिताजी का कपडे का व्यवसाय था। माता लक्ष्मी घर के काम कर लेती थी और अपने परिवार को संभालते हुए हसी-ख़ुशी से रहती थी। इन दोनों को गॉड गिफ्ट मिला और यह गिफ्ट है ,पि टी उषा पी.टी उषा का जन्म 27 जून 1964 में पायोली ग्राम, कोझिकोड जिला ( केरल ) में हुआ है, पीटी उषा दक्षिण रेलवे में अधिकारी के पद पर कार्यरत है। खेलजगत में आत्मविश्वास और दॄढ़ संकल्प के कारण अपनी प्रतिभा का नाम विश्व में अमर किया है।

आज के तारिक में बहुत लोग कहते है की मुझे लड़का होना चाहिए, लकड़ी नहीं, दोस्तों ऐसा कुछ नहीं है अगर आपके घर में लड़की पैदा हुई तो घबराना नहीं आप भी अपने लड़की को पि टी उषा बना सकते हो, दोस्तों नन्हीसी बच्ची संसार में आने के पहले ही उसके माता-पिता उसे पेट में ही मार देते है, लेकिन जिस बच्ची को माता-पिता मारते है उनको यह भी पता नहीं रहता की वो बच्ची पि टी उषा की तरह बने और हमारा नाम गर्व से उचा करे। दोस्तों” बेटी बचाओ और घर में खुशियाँ पाओ।”

पि टी उषाजी ने दौड़ में कैसे पदार्पण किए ….

पि टी उषा को बचपन से ही काम करने, खेलने-कूदने में बहुत रूचि थी। पि टी उषा 4 थी कक्षा में पढ़ती थी तभी उसे खेल में बहुत ही ज्यादा रूचि थी। पी.टी उषा के व्यायाम के टीचर ने 7 वि कक्षा के छात्रा के साथ दौड़ लगाई और उस दौड़ में पीटी उषा की जित हुई। भारत की बेटी पीटी उषा को महिला खिलाडी प्रेरणास्थान मानते है। पि टी उषा सातवि कक्षा में पढ़ती थी तभी उसने उप जिला एथलेटिक्स में भाग लेकर अपने प्रतियोगिता की सुरवात की अपने करियर की सुरवात की और चैम्पियन बनके बहार निकली।

पीटी उषा ने उप जिला एथलेटिक्स में 4 प्रतियोगिता में first अंक हासिल किया और एक प्रतियोगिता में second  क्रमांक प्राप्त किया इसलिए ” जी.वि राजा खेल विद्यालय ”की केरल में स्थापना की गई और लड़कियों के लिए खेल विभाग बनाया गया। पि टी उषा 1976 में कन्नूर के खेल विभाग में शामिल हुई। पीटी उषा के कोच ओ.एम. नाम्बियार ने बहुत मेहनत किए और पीटी उषा को चैम्पियन बनाया।

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ऑलिम्पिक करियर की सुरुवात | The start of Olympic career

पीटी उषा ने अपने करियर की सुरुवात मास्को ऑलिम्पिक सन 1980 से चालू किया।

1980 में मास्को – ऑलिम्पिक में 100 मीटर फर्राटा दौड़ में भाग लिई थी। और कराची आंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेकर 4 Gold Medal हासिल किए।

1981 – पुणे इंटरनेशनल खेल प्रतियोगिता में भाग लेकर 2 Gold Medal हासिल किए।, हिंसार इंरनेशनल प्रतियोगिता में भाग लेकर 1 Gold Medal हासिल किया।, लुधियाना इंरनेशनल प्रतियोगिता में भाग लेकर 2 Gold Medal हासील किए।

1982 में दिल्ली – एशिया खेल प्रतियोगिता में 100 मीटर और 200 मीटर की फर्राटा दौड़ में भाग लेकर जित के  पि पी.टी उषा ने 2 silver Medal हासिल किए।, world junior competition सियोल में सामिल होकर 1 Gold और 1 silver Medal हासिल किया।

1983 में कुवैत -ऑलिम्पिक प्रतियोगिता में एशियाई ट्रैक और फिल्ड प्रतियोगिता में सामिल होकर 400 मीटर दौड़ में जित के 1,Gold Medal हासिल किए। और इसी प्रतियोगिता में 200 मीटर के दौड़ में भाग लेकर 1 silver Medal हासिल किया।, दिल्ली इंटरनेशनल प्रतियोगिता में भाग लेकर 2 Gold Medal हासिल किए।

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1984 में लॉस एंजिल्स में हुए प्रतियोगिता में Medal हासिल करने से नाकाम रही।, इंग्लैंड सयुक्त राज्य में इंटरनेशनल खेल प्रतियोगिता में 2 Gold Medal हासिल किए।  4×400 मीटर रिले दौड़ में सातवा क्रमांक प्राप्त किया, सिंगापूर में आठ देशों के इंटरनेशनल प्रतियोगिता में भाग लेकर 3 Gold Medal हासिल किए, टोक्यो इंटरनेशनल खेल प्रतियोगिता में भाग लेकर 400 मीटर बाधा दौड़ में चौथा क्रमांक प्राप्त किया।

1985 जाकर्ता में आयोजित एशियन ट्रैक और फिल्ड प्रतियोगिता में 5 Gold हलील किए और ” स्वर्ण परी ” किताब से नवाजा गया। जाकर्ता में 100 मिटर, 200 मीटर, 400 मीटर, और 400 मीटर की बाधा दौड़ में जित हासिल करके 5 Gold Medal और 4×400 मीटर के रिले दौड़ में silver Medal हासिल किए और अपना नाम देश के इतिहास में दर्ज किया।,ओलोमेग के विश्व रेलवे प्रतियोगिता में 2 Gold Medal और 2 silver Medal हासिल किए और पी.टी उषा को उत्तम रेलवे खिलाडी घोषित किया गया।

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भारतिय रेलवे इतिहास में प्रथम समय था की किसी महिला या पुरुष को यह सन्मान मिला था। प्राग के विश्व ग्रां प्री खेल प्रतियोगिता में 400 मीटर बाधा दौड़ में 5 वा क्रमांक, लंदन के विश्व ग्रां प्री खेल प्रतियोगिता में 400 बाधा दौड़ में Bronze medal हासिल किया। ब्रिटस्लावा के विश्व ग्रां प्री खेल प्रतियोगिता में 400 मीटर बाधा दौड़ में रजत पदक हासिल किया।

पेरिस के विश्व ग्रां प्री खेल प्रतियोगिता में 400 मीटर बाधा दौड़ में चौथा क्रमांक प्राप्त किया। बुडापेस्ट के विश्व ग्रां प्री खेल प्रतियोगिता में 400 बाधा दौड़ में Bronze medal हासिल किया।लंदन के विश्व ग्रां प्री खेल प्रतियोगिता में 400 बाधा दौड़ में silver Medal हासिल किया। ओस्त्रावा के विश्व ग्रां प्री खेल प्रतियोगिता में silver Medal हासिल किया।केनबरा के world cup में 400 मीटर बाधा दौड़ में पांचवा क्रमांक और 400 मीटर दौड़ में 4 था क्रमांक हासिल किया। Life Story of Paoli Express

पि टी उषा का एथलेटिक सेंटर | pt usha coaching centre

पि टी उषा ने केरला में ” उषा अकादमी ” सेंटर चालू किया है और इस अकादमी में उषा युवा एथलेटिक्स को  ट्रेनिंग देती है। 101 Medal हासिल करने वाली ” उड़न परी ” एशिया की सर्वोत्तम महिला कहलाती है। ” स्वर्ण परी ” के  अकादमी से ट्रेनिंग लेकर तैयार हुए युवा टिंतू लुक्का लंदन ऑलिम्पिक में वीमेंस 800 मीटर में सेमीफइनल तक पंहुचा था।

pt usha awards and medals

सन 1984 में ” पद्मश्री ” और ” अर्जुन पुरस्कार ” से सन्मानित किया गया

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