how to become rahul bajaj businessman : राहुल बजाज बिजनेसमैन कैसे बने?

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बजाज ऑटो.ली. कम्पनी में 1979 को मजूरवर्ग में तनाव निर्माण हुआ और पोलिस गोलीबार हुआ कामगार संघटना की जबाबदारी रूपमय चटर्जी के तरफ थी। पुणे का डॉ.दत्ता को सामंत बनने की इच्छा थी राजीव के पिताजी राहुल बजाज व्यवस्थापन के प्रमुख थे। उस समय उनकी उम्र 40 साल थी। बजाज ऑटो कम्पनी की परिस्थिति बहुत ही बिकट थी 16 जून को कामगारों ने संप का ऐलान किया था। धिरे-धीरे 900 कामगार जमा हुए और कामगारों ने एसिड और टिन फेके कामगार काबू में नहीं आरहे थे और पोलिस को गोलीबार करना पड़ा। उसमे 2 मजूर और जमाव का एक भैया का निधन हुआ और 40 पोलिस जखमी हुए थे।

राहुल बजाज बहुत ही विचारी आदमी है ,’एशिया विक ‘ और ‘पूना डायजेस्ट ‘ जैसे पेपर के पहले पृष्ट पर उनकी खबर की जानकारी रहती थी और वे पढ़ने में उन्हें बहुत ही अच्छा लगता था। बजाज ऑटो यह विश्व की चौथे नंबर की कम्पनी है ( बिक्री 1995 को 2200 कोटि रु.)

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राहुल बजाज का पूरा नाम :- राहुल कमलनयन बजाज उनके माताजी का नाम :- सावित्रीबाई बजाज , राहुल बजाज का जन्म 10 जून 1938 को कलकत्ता में हुआ। राहुल बजाज इनकी शिक्षा मुंबई के नामवन्त कैथड्रल और जॉन कॉनन स्कुल में हुवा और दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से उन्होंने अर्थशास्त्र में बीए (ऑनर्स ) पदवी 1958 में संपादित किए। how to become rahul bajaj businessman

उसके बाद वे मुंबई आए सुबह लॉ कॉलेज में जानेलगे और बजाजलेक्ट्रिकल्स में काम करने लगे। 1961 से 62 में मुकुंद कम्पनी में ज्युनियर पर्चेस ऑफिसर थे। उसके बाद 1961 दिसंबर में रूपा घोलप से शादी हुई। और उन्हें राजीव (जन्म 1966), संजीव (जन्म 1969) सुनयन केजरियल (जन्म 1971) तीन दांपत्य को जन्म दिया । राहुल के दादाजी जमनालाल बजाज को  (1889-1942) महात्मा गाँधी पांचवा पुत्र मानते थे।  कमलनयन यह कांग्रेस के खासदार थे। how to become rahul bajaj businessman

26 नव्हंबर1964 को उम्र के 26 साल में ही राहुल बजाज टेम्पो में उपमहाव्यवस्थापक पद का पदभार सँभालने लगे। खरेदी, मार्केटिंग, विक्री, हिशाब, अर्थपुरवठा, ऑडिट, इतने काम देखना पड़ता था। बजाज ऑटो में प्रमुख और बजाज टेम्पो के व्यवस्थापकीय संचालक नवल.के.फिरोदिया (1910 से 1997) यह राहुल बजाज इनके बॉस थे। how to become rahul bajaj businessman

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फिरोदिया अहमदनगर के वकील थे। 1942 के चलेजाव आंदोलन में शामिल थे। उन्हें येरवडा में कारावास हुआ था। कांग्रेस पक्ष के कारन 1920 में बजाज परिवार से पहचान लगी। खादि के कपडे और गाँधी टोपी ऐसा उनका पहनावा था। बजाज उद्योगसमूह में दाखल हुए और स्कूटर,ऑटोरिक्षा उत्पादन में सयुंक्त प्रकल्प खड़ा करने में सहाय्यता किए। 1957 में बजाज टेम्पो ने जर्मन तंत्रज्ञान का उपयोग करके तीनचाकी वाहन उत्पाद करने का काम चालू किए।

1995 में 40. 25 अब्ज रु.के बजाज उद्योगसमूह की जबाबदारी पांच सदस्य के तरफ थी राहुल, शिशिर अभी शेखर मधुर और नीरज शाह इनके साथ भागीदारी में मुकुंद ली.यह कम्पनी बाजुमें रखते हुए बजाज समूह के इंजीनिअरिंग उयोग के 20 कम्पनी है, और कामगार की संख्या 29 हजार है। बजाज ऑटो यह सबसे ज्यादा नफा कमानेवाली कम्पनी है। 21 सप्टेंबर 1994 को रामकृष्ण बजाज इनका निधन हुआ और इस समूह के प्रमुख राहुल बजाज हुए।

शेखर बजाज इलेक्ट्रिकल्स के काम देखते है, वालुंज में स्थित बजाज ऑटो कारखाने के प्रमुख अधिकारी मधुर इनकी बजाज ऑटो के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति हुई, नीरज मुकुंद ली.का व्यवस्थापकीय संचालक है,साखर उत्पादन करनेवाली बजाज हिन्दुस्थान कम्पनी शिशिर चलाते  है , राजीव तिस साल पहले बजाज ऑटो में शामिल हुआ और मार्केटिंग,संशोधन व विकास विभाग का प्रमुख है संजीव जबाबदारी लेने के लिए तयार नहीं है और सुनयना बजाज व्यवस्थापन में अपनी भूमिका दिखाने में इच्छा नहीं रखते।

rahul bajaj achievements : राहुल बजाज के पुरस्कार की जानकारी

  • 2001 में ” पद्मभूषण ” से सम्मानित।
  • अलुमनी पुरस्कार से सम्मानित।
  • 1975 में राष्ट्रीय गुणवत्ता एंश्योरेंस संस्था द्वारा ” मैन ऑफ़ डी ईयर ” से सम्मानित किया गया।
  • 1992 में ” प्रिंस ऑफ़ वेल्स इंटरनेशनल बिजनस फोरम ” का सदस्य बनाया गया।
  • 1996 में ” राष्ट्र भूषण ” से सम्मानित।
  • 2000 में ” तिलक पुरस्कार से सम्मानित।
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