How did Dr. A.P.J.Abdul kalam Pilot Engineer? (pilot engineered for flight)

How did Dr. A.P.J.Abdul kalam Pilot Engineer? (pilot engineered for flight):डॉ.ए.पि.जे अब्दुल कलाम पायलट इंजिनीअर कैसे बने?

 How did Dr. A.P.J.Abdul kalam Pilot Engineer? (pilot engineered for flight)

 

पायलट इंजीनियर कैसे बनें?:How to become a pilot engineer?

दोस्तों नमस्ते, डॉ.ए.पि.जे.अब्दुल कलामजी पायलट इंजीनिअर( Aeronaytical Engineer ) कैसे बने, पायलट इंजिनिअर इस में ट्रेनी इंजिनीअर ,रॉकेट इंजिनिअर की प्रैक्टिकल जानकारी आपको मिलनेवाली है।

डॉ ए.पि.जे अब्दुल कलाम इंजिनियरिंग के लास्ट ईयर में प्रोजेक्ट पूरा होने के समय कॉलेज के ” एमआईटी तमिल संगम ” इस साहित्य मंडल ने एक निबंधस्पर्धा रखी गई इस में अब्दुल ने भाग लिया। डॉ अब्दुल कलाम  छोटे थे, तब से उनके मन मे पायलट बनने की इच्छा थी। इस स्पर्धा में उन्हों ने ” अपना विमान मैं बनावू ” इस   विषय पर अब्दुलजी ने निबंध लिखा। यह निबंध तमिल भाषा में लिखा क्यों की अब्दुलजी की मातृभाषा तमिल थी। Dr. A.P.J.Abdul kalam Pilot Engineer

डॉ. अब्दुल कलाम जी का यह निबंध टीचर को अच्छा लगा और प्रथम क्रमांक से स्पर्धा में हुए। तमिल भाषा के ” आनंद विकटन ” इस साप्ताहिक के संपादक श्रीदेवा इनके हस्ते अब्दुलजी को प्रथम क्रमांक का बक्षिस  मिला। उस समय अब्दुलजी के गुरु प्रा.स्पाँडर ने विस्मयबोधक शब्द निकले ” संभवतः जितना संभव हो उतनी कोई अन्य चीज नहीं है। आप संघर्ष करनेवाले छात्र हो, सफलता के लिए प्रयास करे, भगवान तुम्हारे साथ है। इसी प्रा.स्पाँडर ने निरोपसमांरभ के समय ग्रुप फोटो निकालते समय अब्दुल पींछे खड़ा था, उसे अपने पास बुलाके  आगे बैठने को कहा और पीठ पे हाथ रख के कहा अब्दुल आप अपना और अपने गुरु का नाम भविष्य में बहुत आगे लेके जाएगा। Dr. A.P.J.Abdul kalam Pilot Engineer

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डॉ.अब्दुल कलाम हिंदुस्थान एरोनॉटिक्स ली बंगलोर इस संस्था में प्रक्षिक्षण लेने लगे। उन्होंने प्रैक्टिकल बराबर किए और कम पढ़ेलिखे लेकिन अनुभव से आगे निकलनेवाले विमानसुधारनेवाले मजूरों को  अब्दुल ने गुरु माना था।

डॉ.अब्दुल कलाम एरोनॉटिकल इंजिनीअर बनने के बाद नोकरी के लिए दो जगह पर जॉब करने को बुलाया गया। हवाई दल में पायलट के लिए  और भारत सरकार के सरंक्षण मंत्रालय तांत्रिक विकास और उत्पादन संचालनालय में जॉब करने के लिए रिज्यूम सबमिट किए थे, दोनों जगह बुलाया गया सबसे पहले देहरादून में उन्हें पायलट के लिए बुलाया गया लेकिन नोकरी मिली नहीं।

दिल्ली के सरंक्षण मंत्रालय के संचालनालय के  ” डायरेक्टोरेट ऑफ़ टेक्नीकल डेव्हलपमेंट अण्ड प्रॉडक्शन ” में नोकरी  मिली। उसके बाद दिल्ली में वैज्ञानि सहाय्यक के पद पर दिल्ली में नोकरी पर लगे। उसके बाद कानपूर में विमान की जाँच करने का काम किया। इसलिए विमान के सभी यांत्रिक पार्ट की जानकारी अब्दुलजी को पता हो गई।Dr. A.P.J.Abdul kalam Pilot Engineer

विमान उड़ाना और जमीन पर उतारना इसमें अब्दुल तज्ज्ञ बन गया। तीन साल के बाद अब्दुल कलाम जी को बंगलोर के विमान-विध्या-विकास ( Aeronautical Development Establishment ) इस संस्था में भेजा गया। वहा पंखविरिहित हलकी और जलद मशीन तयार करने के प्रकल्प में काम मिला। इस प्रकल्प के मॉडेल बनाने के लिए एक साल लग गया। इस मॉडेल से  युद्ध के लिए ” हॉवर क्रॉप्ट ” इस वाहन को तयार किया। उसे ‘ नंदी ‘ नाम दिया गया।

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उस समय के सरंक्षण मंत्री कृष्ण मेनन जी को ” हॉवर क्रॉप्ट ” बहुत ही पसंद आया और यह साड़ेपाचशे किलो वजन लेके जा सकता है। कुछ दिनों में बाद हॉवर क्रॉप्ट गोडाउन में रखा गया। अभी हम हॉवर क्रोप्ट परदेश से आयात करते है। एक दिन डॉ.मेदिस्तान ने अब्दुल को बताया की कल आपको मिलने के लिए एक आदमी आनेवाला है और उन्हें ”नंदी ” में बहुत ही लगाव है।

वह व्यक्ति थी मुंबई के ”टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ फंडामेंटल रिसर्च सेंटर” के संचालक प्रो.एम.जी के मेनन उन्हों ने आठ ही दिन में अब्दुल को ” इंडियन कमिटी फॉर स्पेस रिसर्च ”( इंस्कोस्पार ) इस संस्था में साक्षात्कार के लिए भेजा। साक्षात्कार लेनेवाले व्यक्ति थे डॉ विक्रम साराभाई, प्रो.एम जी के मेनन और ऑटोमिक एनर्जी कमीशन के सहाय्यक सचिव श्री.सराफ थे साक्षात्कार में पास हुए और  इन्कोस्पार में रॉकेट इंजिनीअर के पद पर नियुक्त किए ।

डॉ विक्रम साराभाई ने अब्दुल कलाम को नियुक्त किय इन्कोस्पार संस्था ने थुंबा में ” थुंबा एक्वेटोरिअर रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन ” का निर्माण किया । डॉ.अब्दुल कलाम इस बात से बहुत खुश थे और विक्रम साराभाई के फैन बन गए। ”थुंबा” केरड़ के  ”त्रिवेंद्रम ” में एक छोटा खेड़े गांव है। धरती के चुंबकीय विषुववृत्त के पास है इसलिए यह स्थान निश्चित किया गया है। इस क्षेत्र में बहुत पुराना चर्च है जिसका नाम ” सेंट मेरी मोंडेलन चर्च ” यहाँ पर ही ऑफिस दिया है। इस चर्च में पहली प्रयोगशाला चालू हुई। इसी चर्च में भारतीय  अवकाश संग्रालय स्थापन है।

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थुंबा में चर्च के पास रूम थी उस रूम में अब्दुल कलाम ड्राईंग और डिझायनिंग का काम करते थे। इस अवकास संग्रालय का विकास अब्दुल कलाम को करना था। इसलिय संस्थाने उन्हें अमेरिका के ” नासा ” में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया। अमेरिका में जाने के बाद अब्दुल कलाम व्हर्जिनिया के हॉप्टन के लॉगले रिसर्च सेंटर में गए। उसके बाद मेरीलैंड प्रान्त के ग्रीनवेल्ट इस गांव में स्थित ”गोडार्ड स्पेस फ्लाईट सेंटर ” में दाखल हुए।

वहा  नासा के तरफ से भेजे गए उपग्रह को नियंत्रित किया जाता था। इसका डॉ अब्दुल कलाम जी ने अभ्यास, निरिक्षण और परीक्षण किया और लास्ट में वैलप्स आयलैंड्ला के केंद्र में रॉकेट की चाचणी किस तरह से लेना चाहिए इसका प्रशिक्षण पूरा किया।

इस तरह से डॉ.ए.पि.जे अब्दुल कलाम जी ने पायलट इनजिनिअरींग की पढ़ाई किए।

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