Biography of A.P.J Abdul Kalam Ji : डॉ.ए.पि.जे अब्दुल कलाम जी का जीवन चरित्र

Biography of A.P.J Abdul Kalam Ji : डॉ.ए.पि.जे अब्दुल कलाम जी का जीवन चरित्र, a p j abdul kalam early life and education,

Do. A.P.J Abdul kalam

 

डॉ. अब्दुल कलाम | Dr. Abdul Kalam

डॉ.अब्दुल कलाम विश्व में ” मिसाईल मैन ” से जाने जाते है। और वे भारत के ग्यारवे राष्ट्रपति थे। भारत सरकार ने 1981 में ” पद्दभूषण ” सन 1990 में ” पद्द्विभुषण ” और मार्च 1998 में ” भारतरत्न ” से सम्मानित किया है। पंडित नेहरू जैसे वे छोटे बच्चों से प्यार, स्नेह, दुल्हार करते थे। यही छोटे बचें भारत के आनेवाले कल के निर्माण करता है। राष्ट्रपति पद की शपथ लेते समय अपने भाषण में कहा है की भारत को विकसित बनाना है और अपने भाषण की समाप्ति ” युवकाचे गीत ” यह कविता पढ़ कर किए थे। अब्दुल कलाम का वारीस नहीं है। अपना परिवार भारत को ही मानते थे और हमारा भारत देश ” सुजलाम सुफलाम” होना चाहिए ऐसा उनका कहना था।

डॉ.ए.पि.जे अब्दुल कलाम जी का परिचय | Introduction to Dr. A. P.J. Abdul Kalam

डॉ.अब्दुल कलाम इनका जन्म एक गरीब मुस्लिम नाविक परिवार में दि. 15 ऑक्टोबर 1931 को तमिलनाडु राज्य के रामेश्वर गांव में हुआ है। उनका पूरा नाम :- आबुल पाकिर जैनुलाबदीन अब्दुल कलाम है। इस नाम में अब्दुल कलाम के पंजोबा (आबुल ), दादाजी (पाकिर ) , पिताजी (जैनुलाबदीन ) इतने नाम अब्दुल कलाम के नाम में आते है। उनके माताजी का नाम ” अशियम्मा ” है। उन्हें ‘ मुस्तफा ‘ और ‘ कासिम महमद ‘ नाम के दो भाई थे। और ‘जोहरा ‘ नाम की एक बहन थी।

शमशुद्दीन नाम का बहुत दूर का एक लड़का था उन्हें अब्दुल कलाम अपना भाई समजता था उसका काम पेपर बाटने का था। अब्दुल जी उनके साथ पेपर के गठ्ठे , पेपर बाटना , इ. काम अब्दुल कलामजी करते थे। पेपर की न्यूज पढ़ने मिलता था। इसलिय वे काम बड़े मेहनत से करते थे। इस माध्यम से उन्हें आत्मसमान, मेहनत  क्या होता है, इसका महत्व समजने लगा।

डॉ.ए.पि.जे अब्दुल कलामजी की पढ़ाई | Dr. P.J. Abdul Kalam’s studies

रामेश्वर गांव में प्राथमिक शिक्षा पूरी होने के बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए ‘ रामनाथपुरम ‘ चले गए वहा पर ” स्वार्झ हायस्कूल ” में प्रवेश लिए। रामनाथपुरम को जाते समय उनके पिताजी उन्हें छोड़ने आए थे। गाड़ी चालू  होने से पहले अब्दुल को कहने लगे ” अब्दुल रामेश्वर में तेरा शरीर रहता था, आत्मा नहीं।

तेरे आत्मा का निवास तेरा उज्ज्वल भविष्य बनाएगा, हम वहा तक नहीं पहुँच सकते लेकिन तुझे पहुँचना है। ” अल्हा पे भरोशा रख उसकी कृपा तेरे पर हमेशा रहे और यह कृपा तेरी आत्मा का विकास करेगी ”। उनके पिताजी के यह शब्द अब्दुल के लिए आशीर्वाद था और उन्होंने मन ही मन में स्विकार कर लिया।

रामनाथपुरम को छोड़ने के लिए अब्दुल के साथ शमशुद्दीन और जलालोद्दीन इस दोनों ने उसका नाम स्वार्झ माध्यमिक विद्यालय में दाखिल किए। स्वार्झ माध्यमिक विद्यालय के टीचरों मे से उनके आदर्श टीचर ” इयादुराई सालोमन ” थे। गुरु और शिष्य की जोड़ी बहुत अच्छी जमी। उनके गुरु उनके मातापिता ही बने, अब्दुल को कहते थे की, अब्दुल तू अशिक्षित मा-बाप, खेडेगांव, गरीब घर का लड़का है तो क्या हुवा, आपको जो हासिल करना है, तुझे जो बनना है, तेरा जो सपना है, तू पढ़ाई करके अपना करियर बना सकता है।

अपने जीवन के नैया का हर इंसान कप्तान बन सकता है, इसलिय तेरे मे वैसी इच्छा चाहिए, महत्वकांक्षा चाहिए, इस महत्वकांक्षा से कठोर निश्चय करना चाहिए और कठोर निश्चय पूरा होते तक मन से दॄढ विश्वास से लगातार लगन से पढ़ाई करना चाहिए यह शब्द, यह गुरुपदेश अब्दुल कलाम के जीवन में दिपस्तंभ की तरह मार्गदर्शक साबित हुए है।

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गणित यह विषय सभी छात्रओं का कठिन विषय है, अब्दुल स्कुल में अपने दोस्तों से कहता है अगर हमने प्रयत्न किय तो गणित में सौ(100) में से सौ(100) मार्क ले सकते है, इस बात पर सभी दोस्त हसेने लगे लेकिन एक दिन प्रतिज्ञा के समय गणित विषय का टीचर आगे आया और कहने लगा की हमारे लिए गर्व की बात यह है की हमारे स्कुल के छात्र अब्दुल कलाम ने गणित विषय में सौ (100) में से सौ(100) मार्क लिए है।Biography of A.P.J Abdul Kalam Ji

अब्दुल की हायस्कूल की पढ़ाई पूरी हुई। आगे क्या करना चाहिए, उनके पिताजी की इच्छा थी की अब्दुल ” कलेक्टर बनना चाहिए। कलेक्टर बनने से बेहतर अब्दुल के मन में ” पायलट ” बनने का सपना था। इस के लिए अब्दुल ने विज्ञान की पढ़ाई करने का निश्चय किया।Biography of A.P.J Abdul Kalam Ji

विज्ञान के कॉलेज ‘ तिरुचिरापल्ली ‘ याने ‘ त्रिचनापल्ली ‘ यहां है। उनका छोटा रूप ‘ त्रिची ‘ है। सन 1950 में अब्दुल ‘ त्रिची ‘ के सेंट जोसेफ ‘ कॉलेज में  दाखिल हुए। सेंट जोसेफ कॉलेज में अब्दुल ने चार साल पढ़ाई की उसमे इंग्रजी, गणित, भौतिकशास्त्र, विज्ञान, ग्रहविज्ञान, अंतरालविज्ञान, फलज्योतिष इ. विषय का पूरा अभ्यास किया।Biography of A.P.J Abdul Kalam Ji

बी.एस.सी करते समय अपने को आगे क्या करना चाहिए इसकी कल्पना अब्दुल को नहीं थी। इंटर सायन्स इंजिनिअरींग कर सकते है इसका भी उसे पता नहीं था। उसके बाद उसे समझ में आया की, इंजिनिअरींग की पढ़ाई मुझे ” पायलट ” बनने के काम आएगी। इंटर के बाद इंजिनिअरींग किया रहता तो दो साल बचे रहते। लेकिन जीवन में कि हुई पढ़ाई बेकार नहीं जाती इस शब्द पर अब्दुल कायम था। इसलिए बी.एस.सी होने के बाद उन्होंने अभियांत्रिकी महाविद्यालय में नाम दाखल किए।

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Madrash enstiyut of T

मद्रास इंस्टीटयूट ऑफ़ टेक्नॉलॉजी में अब्दुल ने एडमिशन के लिए अर्ज किया और नंबर लग गया लेकिन एक हजार रूपये एडमिशन की फिस थी। अब्दुल के पिताजी के पास एक हजार रु. नहीं थे। उसकी बहन ” ज़ोहरा ” ने अपने सोने के कंगन और साखड़ी गिरवी (बंधक) रखे और एडमिशन फिस भरे उसके बाद रहने का और खाने का प्रश्न आगे आया इसके लिया अब्दुल को स्कॉलरशिप मिलना जरुरी था अब्दुल को स्कॉलरशिप मिलना चालू हो गई और अब्दुल पढ़ाई करने लगा। [ टिप :- दोस्तों अगर आप यह लेख पढ़ रहे हो तो आपके भाई,बहन पढ़ाई कर रहे हो तो उनकी मदद जरूर करना ]

मद्रास में तीन साल की पढ़ाई करते समय अब्दुल कलाम का भविष्य तीन टीचरों ने बनाए, प्रा.स्पाँडर, प्रा. पंडलाई, और प्रा. नरसिंगराव यह अब्दुल के आदर्श टीचर थे। प्रा स्पाँडर ने अब्दुल को ”एअरोडाइनोमिक्स”(वायुगतिशास्त्र ) पढ़ाए। वे विमान इंजीनियरिंग के विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर थे। प्रा.पंडलाई ने ” विमान योजना और पृथःकरण यह विषय पढ़ाए। प्रा.नरसिंगराव यह गणित में विशेषज्ञ, इन्होंने अब्दुल को ” वायुगतिशास्त्र ” पढ़ाए इन त्रिमूर्ति के कारण अब्दुल कलाम जी का ” पायलट & पायलटों ” बनने का सपना पूरा हुवा।

पढ़ाई करते समय उन्हें जो मदद मिली उसको अब्दुल कलाम कभी  भुल हि नहीं सकते, अगर हमारी भी किसी ने मदद की होतो हमें भी नहीं भूलना चाहिए। अब्दुल कलाम को उनके चार छात्र के साथ एक प्रोजेक्ट दिया गया। उस प्रोजेक्ट में निचे के दुरी पे हमला करते हुए विमान की योजना बनानी थी। लेकिन बहुत दिन तक छात्रों ने प्रोजेक्ट अच्छी तरह बना के दिए नहीं।

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इस प्रोजेक्ट को बनाने के लिए तीन दिन का समय दिया गया अगर आपने यह तीन दिन में बनाए नहीं तो अब्दुल की स्कॉलरशिप नहीं दी जाएगी ऐसी धमकी अब्दुल को दी गई। अब्दुल के आगे जीने मरने का प्रश्न था अगर स्कॉलरशिप नहीं मिलेगी तो पढ़ाई नहीं हो पाएगी, इस कारन अब्दुल ने तीन दिन, तीन रात जग के प्रोजेक्ट की परीयोजना बनाके दिया।

जीवन में मुसीबतों का सामना करना चाहिए तान-तनाव में काम करना चाहिए इस कारण अब्दुल बड़ी सी बड़ी समस्या का हल निकाल देते थे। तीन साल की पढ़ाई पूरी करके ” मद्रास इंस्टीटयूट ऑफ़ टेक्नॉलॉजी ” इस संस्था से एरोनॉटिकल इंजीनियर ( Aeronaytical Engineer ) ” पायलट इंजिनीयर ” बन के डॉ.ए.पि.जे अब्दुल कलामजी बहार निकले।

डॉ.ए.पि.जे अब्दुल कलाम जी की तरह आपने सच्चे मन और लग्न से पढ़ाई की तो मेरा मानना है की आपका जो सपना है, वो जरूर पूरा होगा।

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