संविधान के स्वरुप | Nature of Constitution (nature of constitution of india)

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संविधान के स्वरुप | Nature of Constitution (nature of constitution of india)

 

दोस्तों नमस्ते इस लेख के माध्यम से आप को भारतीय संविधान की जानकारी मिलेगी हम सभी स्पर्धा परीक्षा  देते है और स्पर्धा परीक्षा में हमें संविधान के बारे में Question आते है, तो दोस्तों इस लेख को पढ़ के अच्छे मार्क लेकर अपना भविष्य उज्जवल कीजिए, इस लेख को अपने दोस्तों में share अवश्य कीजिये। Nature of Constitution

अलग अलग देश के संविधान का वितरण तीन step में किया है

१ ) Unitary संविधान

२ ) Federal संविधान

३ ) Unitary और Federal इन दोनों में रहने वाला संविधान

केंद्र शासन और राज्य शासन के नुसार भारतीय संविधान की तीन श्रेणिओं में अधिकार की विभागणी हो चुकी है

Unitary-संविधान

Unitary संविधान के नुसार सभी अधिकार केंद्र शासन के रहेंगे।राज्य शासन को कोई भी घटनात्मक अधिकार नहीं रहते। केंद्र शासन ने दिए गए अधिकार का ही उपयोग राज्य शासन कर सकता है। केंद्र शासन ने राज्य को दिए गए अधिकार कभी भी निकाल सकता है।

Federal संविधान

Federal संविधान में केंद्र और राज्य शासन को स्वतंत्र और घटनात्मक अधिकार रहते है। राज्य शासन के अधिकार केंद्र शासन निकाल नहीं सकता है। राज्य की राज्यव्यवस्था स्वतंत्र रहती है। Nature of Constitution

Unitary और Federal संविधान

इन दोनों में रहने वाली राज्य घटना मात्र दोनों प्रकार की रहती है। अमेरिकन संविधान यह पूर्णतः Federal है।  अमेरिका में प्रत्येक राज्य की अपनी राज्य व्यवस्था है,प्रत्येक राज्य का अलग संविधान है,अलग सर्वोच्च न्यायालय है,अलग नागरिकत्व है।

ब्रिटन की राज्य व्यवस्था पूर्णतः Unitary है। और ब्रिटन का संविधान अलिखित है वहा पर सभी अधिकार केंद्र शासन के स्वाधिन रहते है, राज्य को कोई भी स्वतंत्र और घटनात्मक  अधिकार नहीं रहते,केंद्र शासन ने दिए गए अधिकार का उपयोग करना ही राज्य का काम रहता है। केंद्र शासन ने दिए गए अधिकार राज्य की तरफ से कभी भी निकाल सकते है। Nature of Constitution

कॅनडा का संविधान Unitary और Federal इन दोनों में है।

भारतीय संविधान यह एक वैशिष्टपूर्ण संविधान है और निचे दिए गए पॉइंट के नुसार भारतीय संविधान federal है ऐसा कहा जा सकता है।

  • संविधान के नुसार केंद्र , राज्य और अधिकार की विभागणी
  • प्रत्येक राज्य का स्वतंत्र विधिमण्डल और कार्यकारी मण्डल
  • केंद्र और राज्य की स्वतंत्र प्रशासकीय यंत्रणा
  • राष्ट्रपति चयन प्रक्रिया में केंद्र और राज्य का समान सहभाग
  • राज्य का सरंक्षण करने के लिए कायम स्वरूपी राज्यसभा
  • राज्य के अधिकार पर बाधा लानेवाली कोई भी घटना दुरुस्ती विधेयक के किए कम से कम ५० %  राज्य के विधिमंडल की सहमती जरुरी है
  • निचे दिए गए पॉइंट के नुसार भारतीय संविधान Unitary है ऐसा कह सकते है
  • राज्यपाल के नियुक्ति के अधिकार राष्ट्रपति याने की केंद्र शासन को है
  • आनिबानी जाहिर करने का अधिकार राष्ट्रपति याने की केंद्र शासन को है,आनिबानी के समय राज्य के विषय सूचि के विषय पर कायदा करने का अधिकार संसद को है

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  • राज्य के ध्येय धोरण केंद्र के ध्येय धोरण से सुसंगत रहना जरुरी है
  •  केंद्र शासन के कार्यक्षेत्र में आनेवाले विषय की संख्या  १५२ ( १०० + ५२ ) और राज्य के कार्य क्षेत्र में आनेवाले विषय की संख्या ११३ (६१ +५२ )
  • समवर्ती सूचि के विषय पर कायदा करने का अधिकार राज्य के विधिमण्डल के तरफ रहते हुए भी राज्य विधिमण्डल ने पारित किया कायदा यह केंद्रीय विधिमंडलने पारित किया गया कायदा से सुसंगत रहना जरुरी है
  • महत्व  और अधिक उत्पन्न मिलने का स्त्रोत केंद्र शासन के तरफ है
  • राज्य विधिमण्डल ने पारित किए गए विधेयक राष्ट्रपति के मंजूरी के लिए रखना , राज्य  विधिमण्डल ने मंजूर किये गए विधेयक को मंजूरी नहीं देने का राष्ट्रपति को Absolute Veto Power
  • राज्य का कारभार संविधान के नुसार नहीं चलना, इस कारण की वजह से राष्ट्रपति राजवत लागु करने की तरतुत
  • देश में आर्थिक आनिबानी जाहिर करने का अधिकार मात्र केंद्र शासन याने की राष्ट्रपति को है
  • राज्य की सिमा बदल, नाम में बदल करने का अधिकार संसद को है
  • भारतीय संविधान के पुस्तक में संघीय शब्द का उपयोग नहीं किया गया है

संविधान के स्त्रोत

  • संविधान का ७० % भाग Govt.of India Act. १९३५ से लिया गया है।
  • नागरिकों के मौलिक अधिकार यह भाग अमेरिका का संविधान ( Bill Of rights ) और मोतीलाल नेहरू समिति अहवाल से लिया गया है।
  • उपराष्ट्रपति पद की तरतुत अमेरिका के संविधान से लिया गया है
  • सर्वोच्च न्यायालय और न्यायिक पुनर्विलोकन यह संकल्पना अमेरिका  के संविधान से लिई गई है।
  • मार्गदर्शक तत्व यह भाग आयरिश संविधान से लिया गया है।
  • संसदीय राज्यव्यवस्था, द्विगृही संसद यह भाग ब्रिटिश संविधान से लिया गया है।
  • Federal राज्य व्यवस्था की संकल्पना कॅनडा के संविधान से लिई गई है।
  • आनिबानी की तरतूद जर्मन देश के संविधान से लिई गई है।
  • समवर्ती सूचि यह संकल्पना आस्ट्रेलिया के संविधान से लिई गई है।
  • नागरिक के मौलिक कर्तव्य का भाग सोव्हीयत रशिया के संविधान से लिया गया है।
  • गणराज्य (Republic) यह संकल्पना फ्रान्स के संविधान से लिया गया है।
  • विधिमंडल और विधिमंडल सदस्य के विशेषाधिकार यह भाग ब्रिटिश अलिखित संविधान से लिया गया है।
  • संसदीय कार्यप्रणाली यह भाग ब्रिटिश कार्यप्रणाली से लिया गया है।
  • संशोधन कार्यप्रणाली का भाग दक्षिण आफ्रिका के संविधान से लिया गया है।
  • भारत का संविधान दूसरे-दूसरे देश से उधार लिया गया है ऐसी आलोचना कुछ विचारवंत ने किए है, परंतु डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने इस आलोचना का पूरी तरह से खंडन किया है अच्छी बाते कहीं पर भी हो उसकी नक़ल करना गैर नहीं है घटना समिति ने  कोई भी देश के संविधान की जैसी की वैसी नक़ल नहीं किए है वहा से अच्छी तरतुत लेकर भारत देश के दॄष्टि से सही हो सकता है ऐसा बदल करके उसका समर्थन किया गया है।

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