Women only woman’s enemy : स्त्री ही स्त्री की दुश्मन (opposer)

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कहते है की, किसी आदमी के success के पीछे किसी ना किसी औरत का हात होता है। स्त्री को माता , सावित्री, सरस्वती, दुर्गा आदि अपनी अपनी बुद्धि के नुसार नाम दिए गए है। घर में पढ़ी-लिखी औरत हो तो वह अपने घर को आगे लेकर जाती है। जिस घर की औरत पढ़ी लिखी नही होती उस घर में ज्यादा शिक्षित हो सकते है। या कम शिक्षित हो सकते है।

Women only woman's enemy : स्त्री ही स्त्री की दुश्मन (opposer)

सफलता के पीछे स्त्री का हात | Woman’s hand behind success

एक दिन एक स्त्री किसी घर में बहू बनकर आती है। कुछ दिनों बाद वही स्त्री सास बनती है। लेकिन जब सास बनती है, तब अपने बहु पर रौष क्यूँ जमाती है? स्त्री को बड़े बड़े शास्त्र में भी बड़ी बड़ी उपाधियाँ दी जाती है। फिर ऐसी महान स्त्री अपनी ही जाती की दुश्मन क्यूँ होती है।

T.V पर अलग-अलग चैनल पर ” सास बहुकी सीरियल आती है। जिसका नाम है, ”क्यूँ की सास भी कभी बहु थी। ” ,चार दिन सास के चार दिन बहु के ” आदि। दोनों सीरियल एक ही है पार्ट अलग है।

समाज में भी यह सास बहु की दास्तान बरसों से चलते आ रही है। कहाणी वही है, सिर्फ पार्ट घर-घर मे change है। गॉव में यह परंपरा आज भी कित्येक घर में दिखाई पड़ती है। आज भी गाव में पड़ी लिखी बहू चार दीवारों के अंदर ही रहती है। कुछ ही गिने चुने घर है। जिसमे पड़ी लिखी बहु को आगे बढाते है और वह बहु भी घर के लोको को लेकर चलती है। या अपनी पढ़ाई का घमंड बताती है। हम ऐसी घटनाएं पेपर ,टी.व्ही पर देखते है की बहुत सी family है, जिसमे स्त्री -स्त्री के खिलाफ है।

जैसे family no. 1 :- बहू को पहली लड़की हुई। दूसरी भी लड़की हूई। उस दूसरे लड़की हो आज भी कलंकित माना जाता है। हमेशा उसे ताने मारे जाते है। लड़की क्यू हूई – इस बात पर सास बहू के रोज झगड़े होते है।

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family no. 2 :- पैसे की लालच से सास का बहू से कहना – मैं अपने बेटे की दूसरी शादी करवा दूंगी। ऐसे झगड़े – झगड़े में ही कुछ दिन निकल गए और बहू को लड़की हूई। सास ने फूल जैसी बहू को पैसो की लालच में बोरी में भरकर रेल पटरी पर बोरी छोड़ दी। train आयी , नन्ही कली की माँ उसके पैदा होते ही इस दुनिया से चल बसी। यह भी स्त्री -स्त्री की वजह से।

family no. 3 :- बहू अपने सास से रोज झगड़ती है। गंदी गालिया देती है। अपनी सास की चुगली दूसरी के सास के पास जाकर करती है।

सदियो से एक ही कहानी चली आ रही है। किसी के घर, सास बहू के खिलाफ है , तो किसी के घर में बहू सास के खिलाफ है।

लड़कों से friendship करना पुराता है। पर लडकियों से नही। क्यूँ की लडकिया जलनखोर ज्यादा होती है। वो मेरे सांमने कैसे गई ? वो मुझ से सुन्दर है तो मैं भी उसकी बराबरी करू , इसलिए पार्लर आदि पागलपन में ज्यादा का पैसा बरबाद करती है।

स्त्री जात में कुछ ईतनी भी नीचे गीरी हुई स्त्री मिलेंगी की वे अपनी किसी बहन का घर उजाड़ कर देती है। किसी के पती को पैसो की लालच के लिए अपने वश में करके अपनी ही किसी बहन का घर उजाड़ देती है। किसी-किसी स्त्री ने हद ही पार कर दी है। अपने शरीर बेचने के धंदे में अपनी जाती को जबरदस्ती खिंचती है। ऐसे स्त्री को कलंकित नाम से ” कोठेवाली ” या ” धंदेवाली ” के नाम से भी जाना जाता है।

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स्त्री को शिक्षित करने के लिए कितने महापुरूष आगे आए। सावीत्री बाई फूले समाज का अपमान सह के स्त्री शिक्षा का बिडा उठाया और उन्हें शिक्षित किया। लेकिन आज इस शिक्षा का भी गलत इस्तेमाल होते हुए दिख रहा है।

” औरत ”, ”औरत ” के नाम पर ही कलंकित साबित हो रही है। बहनो-बहनो में सुंदरता को लेकर झगड़े हो रहे है। दो लड़कियां एक लड़के की वजह से लड़ रहे है। क्या हो गया स्त्री जाती को ?

My deer Mother,s & sister,s हमें Freedom मिला हैं उसे अपने फायदे के लिए ही इस्तेमाल करो। आगे ऐसा न हो की ,हमारी ज्यादा हुशारी हमे फिर से परदे के पीछे लाए।

सिर्फ किताबो में ही कानून कायदे बदले है। हम पेपर पर पढ़ते है की,आज भी दहेज के नाम से लड़की को तकलीफ दे रहे हैं। कहि बहु को,तो कहि सास को जलाया जा रहा हैं। जाने कब स्त्री अपने विचारो में सुधार लायेगी ?

दोस्तों ऐसे बहुत उदाहरण हम समाचार, पेपर ,सावधान इंडिया में देखते है।इसे गलत ना समझे

Jago Girls Jago

अपनी जाती के प्रति जागो

अगर आपके आसपास ऐसा स्त्री के खिलाप अत्याचार नजर आए तो,उसे  समझाने की कोशिस करो, न की भड़काने की।

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