what will people say ending : लोग आखिर क्या कहेंगे (watch online free)

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ऐसा क्यूॅं कहॉं होगा ? आजके युग मे और प्राचीन काल से ही बच्चो को, युवॉं को बडे बुजूर्गो का कंधा समजा गया है। यह बात 100 प्रतिशत सत्य हैं। परंतु आज के जमाने मे इसके उलट ही दिख रहा है। अपने बच्चों के शादी के बाद के रंगीबेरगी सपने मॉं बाप सजाते है। उन्ही सपनो मे खो जाते है। पर एक दिन, एक ही पल मे मॉ बाप के यह सपने चकनाचूर भी हो जाते है। एक ही पल मे मॉं बाप पर्वत के उॅचाईसे दुख के गहरी खाई में गिरते है। ऐसा क्यूॅं? what will people say ending

प्रकृती का नियम ही है की बच्चो के कॉंधे पर बडो का शव जाना चाहिये। परंतु, आज की दुनियॉं मे बच्चो का शव लाश मॉं बाप के कॅंधे पर जाता है। इसका सबसे पहला करण है व्यसन – फिर वो खर्रा, ड्रिंक हो या फिर प्यार का जहर हो! what will people say ending

मॉ बाप चिल्ला चिल्लाकर थक जाते है, की बेटा जहरीली चिजों का जादा सेवन सेहत के लिये हानिकारक होता है। पर बेटा बापसे सव्वाशेर निकलता है। बाप के ऑंखो मे धुल झोंककर सिगरेट पिना, दोस्तो मे गॉंजा, तंबाखू, खर्रा, ड्रिंक आदी बुरी आदतो मे लगना, इस तरह के व्यसन मे जुट जाता है और एक दिन अपनी किमती जिंदगी से हात धो बैठता है। what will people say ending

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जिस तरह से खर्रा, तंबाखू, ड्रिंक, गॉंझा आदी जहरीले चिजोसे कॅंन्सर , टी.बी. जैसी जानलेवा बिमारीयॉं होती है। वैसे ही आधुनिक प्यार इस बिमारीसे मन शरीर, हार्ट याने पूर्ण शरीर बिघाड की ऐसी जहरीली बिमारी होती है, जिसका मौत के अलावा दुसरा उपाय नही. यदी प्यार समज के साथ हो, तो जिंदगी में खुशीयॉं ही खुशियॉं हे। और यही प्यार मतलब का हो ताे दोनो में से एक की जान जाने से भगवान भी नही बचा सकते। what will people say ending

जिन बच्चो को डंजनतपजल भी नही होती या खुद का भला बुरा भी नही समजता, ऐसे बच्चे आज व्यसन के अधीन हो रहे है। छोटे बच्चो को बचपने मे ही जवानी का असर होता है। खर्रा और डिं्रक तो मानो जैसे थ्ेंपवद बनी है।what will people say ending

बच्चो को गलत बाते जल्द ही अच्छी लगती है और वे उन्ही के पिदे दौडते है। और एक दिन उसकी आदत सी होनेपर इस दुनियॉं से अलविदा भी जल्द ही करते है। और बाप फिर अपने दिल पर पत्थर रखकर अपने ही संतान न उठानेवाला बोझा भी उठाते है।

ष्ैवए च्ंतमदजेए इम बंतमनिस वित लवनत बीपसकण् ठमबंनेमए ज्वकंलश्े ूवतसक ंदक जीमपत बनसजनतमे ंतम अमतल ूंजमण् ैवए कव लवनत कनजल चतवचमतसल ंइवनज लवनत बीपसकए ंदक ेंअम जीमपत उवेज पउचवतजंदज सपमिण् ठमबंनेमए प्जश्े वदसल लवनतेण्ष्

लोग क्या कहेंगे ?

समाज मे जीनेवाले ज्यादातर लोग यही सोच के रहते है, की लोग मुझे क्या कहेगे-बोलेगे ? समाज के डर से कभी कभी अपनी अच्छी आदतों को भी छुॅपाते है।

एक लडका था। जिसका नाम जोसेफ था। उसके कॉलेज का उसका पहला दिन था। पहले दिन वह अपने हिसाब से कॉलेज मे आया। शर्ट इन किया था। बालो को तेल था । अर्थात वह सिंपल लिविंग मे था। उसके कुछ फ्रेंड ने कहा – यार, जोसेफ तू इन मत कर। तूझे जचती नही। दुसरे दिन वह बिना इन किया आया । फिर किसीने टोका कैसे आया ? कॉलेज में इन करके आना चाहिये।

तिसरे दिन बालों को तेल न लगाने को कहा, तो चौथे दिन किसीने बालोंके तेल लगाने के लिये बोले। पाचवे दिन उसके सुज के लेकर बोले – ऐसा उसके साथ रोज कुछ न कुछ होते ही रहता था। एक दिन वह इन सब बातो से तंग आ कर कॉलेज आना ही छोड दिया। कॉलेज न जाने पर उसवे कॉलेज से फोन आया की आप कॉलेज क्यूॅं नही आ रहे ? तब उसने सारी हकीकत अपने टिचर को बयॉं कि। उसके टिचवर उसे मिलने गये।

जोसेफ टॅंट गया था। बाहर निकलना और किसीसे मिलना जुलना यहा तक की, उसने अपनी पढाई भी छोड दी थी । जब उसके टिचर ने उसकी यह हालत देखी तो उसे प्यार से समजाया’ जमाने मे कही प्रकार के लोग है। लेकीन अगर आपको आगे बढना है, तो जो आपको अच्छा लगता है।, वही करो। अगर लोंगो के बारे मे सोचोंगे, तो जिवन मे कभी आगे नही बडोगे। जोसेफने टिचर की सलाह मानी और दुसरे दिन से अपने ढंग से कॉलेज जाने लगा। अब उसे कोई कुछ भी बोलता तो वह सिर्फ अपने कामपर और पढाई पर ही ध्यान देता था।

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मेरी एक फ्रेंड की शादी बहोत ही धुमधाम से हुई। उसके पिताजीने भी अपनी बेटी के श्यादी मे किसी भी चीज की कोई कसर बाकी न छोडी। फिरभी समय पे लोगोने और बारातीयों ने भी छोटी छोटी कमियॉ निकाली ही। यह सुनकर अंकल को बडा दुख हुआ और वे बारातीयों से सर झॉंकाकर माफी मॉंगते थे। किसीने मंडप के पडदो मे कमी निकाली।

किसीने खाने मे, किसीने बैठक व्यवस्था मे, किसीने कुछ तो किसीने कुछ। अंकल के एक फ्रेंड उनकी दुविधा देखकर उनके पास गये और उन्हे पुॅंछा दयासिगए बेटी के श्यादी मे ऐसी रोनेजैसी सुरत बनाके मेहमानो को स्वागत क्यूॅं कर रहा है ? तब अंकल ने बताया, की लोग कुछ न कुछ बोल रहे है। तब अंकल के फं्रेड ने समझाया की, तुझे अपनी बिटियॉं के श्यादी मे तेरे हिसाब जो जो करना था, उसे तुने पूरा किया। अब तु अगर लोगों की सोच लेकर बैठेगा तो कभी खुश नही होगा।

तेरे हिसाब से तो सारा अरेजमेंट सही हैं ना ? इस प्रश्नपर अंकल ने समाधन कारक तो से हॉं कहा । इसपर अंकल के फ्रेंड ने कहा, जब सारा अरेंजमेंट तेरे हिसाब से ठिक हैं, तो तू लोगो की सोच से दुख ीमत हो। क्यूॅं की लोगो की सोच के बारे मे सोचेगा तो हमेशा दुख और दर्द के अलावा कुछ हासिलनही होगा।

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आज हर कोई, यह ही सोचता है की, लोग मुझे क्या कहेंगे ? या फिर, मेरा स्टेटस इतना है और मै छोटासा कार्यक्रम करू तो लोग क्या कहेंगे ? किसी करीब को लगता है की मैं अपनी बेटी की श्यादी धुमधाम से करूंगा। चाहे इसके लिये मुझे अपना घर बार दाव पे क्यूॅं न लगाना पडे, पर समाज मुझे कुछ बोलना नही चाहिये। फिरभी समाज उसमे खोट निकालता ही है।

आप अगर दुसरों की सोच की वजह से बदलते हो , तो यह अच्दा नही । ’’ आप क्या चाहते हो ? कैसी लाईफ जीना पसंद करते हो ? ये सिर्फ आपकी सोच होना चाहिये। सिर्फ इतना ध्यान मे रखना की, आपकी वजह से किसी की दुख न हो, या किसीका कोई नुकसान न हो।

आप अपने लिये अपना टारगेट तय करो। उसका नियोजन करो। उसी राह पर चलो। अगर आपकी सोच अच्छी है, ध्येय अच्दा है, आपने सकारात्मकता के साथ चलना शुरू किया तो आपको मंजिल भी मिलके ही रहती है। एक बार आपको मंजिल मिली तो बालनेवाले लोग भी आपके कदमो तले आते है। इसिलिये, लोग क्या बोलेंगे? क्या कहेंगे? उसके बारे मे सोचना बंद करा और अपने कार्य पर ध्यान दो।

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