Subrahmanyam Chandrasekhar Biography : डॉ.सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर की जीवनी

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Subrahmanyam Chandrasekhar Biography : डॉ.सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर की जीवनी

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डॉ . सुब्रम्हण्यम चंद्रशेखर अय्यर जी का जन्म १९ ऑक्टोबर १९१० को लाहोर में हुआ। पिताजी का नाम सी.एस अय्यर था , रेल्वे विभाग में सिव्हिल अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। डॉ . सुब्रम्हण्यम चंद्रशेखर जी की प्राथमिक पढ़ाई लाहोर में हुई , और बाकि की पढ़ाही ‘मद्रास’ के ‘ प्रेसिडेन्सी कॉलेज’ में हुई, उन्हें गणित विषय में रूचि थी। पिताजी के कारण भौतिकशास्त्र का अध्ययन करने लगे।

छोटेपण में आकाश की और देख ते थे, तो उन्हें लगता था, की तारोंकी उतपत्ति कैसे हुई होगी , डॉ सी व्ही रामन, चंद्रशेखर के मामा है। १९३० में चंद्रशेखर बी.एस .सी टॉप में पास हुए। इंग्लैंड के प्रसिद्ध वैज्ञानिक राल्फ एच का ‘ छोटे तारे ‘ निबंध का अध्यन किया , उसके बाद लेख लिखा , यह लेख १९२८ में ” प्रोसिडिंग ऑफ़ दि रॉयल सोसायटी ” में प्रकाशित हुआ। ” क्रॉम्पटन स्कैटरिंग अण्ड द न्यू स्टेटिस्टिक्स ” यह लेख का शीर्षक था। चंद्रशेखर का लेख राल्फ फॉलरन ने पढ़ा और प्रभावित हुआ। केंब्रिज विश्वविद्यालय में उच्चशिक्षण लेने का सल्ला दिया। ३१ जुलाई १९३० को इंग्लैंड गए। Subrahmanyam Chandrasekhar Biography

लेख लिखा , वहा लिखा था सफेद लघुतारोका आकर और वजन आयुर्मान कम है इस की खोज करते आती है। मामा का आदर्श चंद्रशेखर के आगे था। ६ साल केंब्रिज विश्वविद्यालय में रहकर भारत आ गए। मद्रास में प्राध्यापक की नोकरी नही मिली। शिकागो विश्वविद्यालय में बुलाया गया। Subrahmanyam Chandrasekhar Biography

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चंद्रशेखर जी की शादी ललिता देशाई स्वामी के साथ हुई। शादी के बाद अमेरिका चले गए। प्रसिद्ध खगोलशास्त्रज्ञ डॉ ओटोस्टूवे इन्होंने चंद्रशेखर को भाषण देने को अमेरिका के यर्कवेधशाला में बुलाया गया , भाषण सुनकर उनको शिकागो विश्वविद्यालय में प्राध्यापक की नोकरी दी गई। ”तारोकी रचना और उनके भौतिक गुण ” यह उनके खोज का विषय था। जिस पदार्थ से पृथ्वी ओर सूर्य की उतपत्ति हुई , उसी पदार्थ से तारे और ग्रह की उतपत्ति हुई।

नियम के आधार पर उन्होंने नए-नए तारोकी खोज करना चालू किए। चंद्रशेखर के नुसार सूर्य अंत काल तक एक ही अवस्था में नही रहेगा , जैसे जैसे ज्वलन का इंधन कम होगा, वैसे वैसे सूर्य के आकर में बदल होगा , जिस दिन सूर्य का आकर बढ़ा होगा , उस दिन सबसे पहले ‘ बुध’ ग्रह को नष्ट करेगा , उस के बाद शुक्र को ओर लास्ट में पृथ्वी को नष्ट करेगा , इस तरह से एक दिन पूरी ‘ जीवसृष्टि’ नष्ट हो जायेगी यह उन्होंने बोल के रखा है।

तारा ८ सोलर भार तक पोहच कर अपना वजन कम कर शकते है। एक निचित सिमा तक पोहच कर वजन कम करने का काम रुख जाता है  इस सीमा का खोज चंद्रशेखर ने लगाया था। इस सिमा खोज को ” चंद्रशेखर लिमिट ” नाम दिया गया। यह सिद्धान्त ८ सोलर भार से अधिक तारो को लागु होता है।

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पृथ्वी से सूर्य की लम्बाई ” ९ करोड़ , ३० लाख मैल” है। सूर्य की किरण पृथ्वी तक आने के लिए ”८ मिनट ” लगते है। १९३९ में शिकागो विश्वविद्यालय के प्रेसने , ” तारो की रचना ” इस विषय पर ” ऑन इंट्रोडक्शन टू द स्टडी ऑफ़ स्टैला स्ट्रक्चर ” यह पुस्तक प्रकाशित हुई। १९४३ में ” प्रिंसिपल्स ऑफ़ स्टैलर डायनामिक्स ” पुस्तक प्रकाशित हुई। १९४० में चंद्रशेखर जी ने भारत में ” रामानुजन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैथमेटिक्स ” इस संस्था की स्थापना की।

चंद्रशेखर जी को केंब्रिज विश्वविद्यालय ने ” एडम्स पुरस्कार ” देकर सम्मानित किया। १९६१ में ” पद्दविभूषण पुरस्कार ”, ” रामानुज पदक पुरस्कार ” से सम्मानित हुए। डॉ सुब्रम्हण्यम चंद्रशेखर जी को १० दिसम्बर १९८२ ( भौतिकशास्त्र ) में नोबेल पुरस्कार दिया गया। डॉ सुब्रम्हण्यम चंद्रशेखर जी का निधन २१ ऑगस्ट १९९५ में हुआ।

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